Wednesday, July 22, 2026
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अमेर‍िकी सैन्‍य व‍िमानों में ईंधन भरने को तैयार नहीं इजरायल, कहा- बेन गुरियन एयरपोर्ट की क्षमता खत्म

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नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। इजरायल ने अमेर‍िका के ईंधन भरवाने वाले सैन्‍य विमान की रिफ्यूलिंग पर असहमति जताई है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के चलते बड़ी संख्‍या में अमेर‍िकी सैन्‍य एयरक्राफ्ट रिफ्यूलिंग के ल‍िए इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर पहुंच रहे हैं, ज‍िस कारण वहां की यात्र‍ी व‍िमानों की फ्लाइट्स प्रभाव‍ित हो गई हैं।

इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की र‍िपोर्ट के अनुसार, एक इजरायली अधिकारी ने बयान जारी कर और अध‍िक व‍िमानों की रिफ्यूलिंग पर असहमत‍ि जताई है। अधिकारी ने चेतावनी दी है कि अगर बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिका के और अधिक ईंधन भरने वाले विमान पहुंचते हैं, तो इससे उड़ानों को रद्द करना पड़ सकता है और देरी भी हो सकती है।

आईआरएनए के अनुसार, इजरायल ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी के हवाले से इजरायल एयरपोर्ट्स अथॉरिटी के महानिदेशक शेरोन केडमी ने कहा कि अगर बेन गुरियन एयरपोर्ट को अमेरिका के और रिफ्यूलिंग विमानों को जगह देनी पड़ी, तो वह सभी तय उड़ानों को संभाल नहीं पाएगा।

केडमी ने कहा, “हम उड़ानें रद्द होने से बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। यहां और दूसरी जगहों पर अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान मौजूद हैं। हम वायुसेना के संपर्क में हैं और हर कोई जिम्मेदारी निभा रहा है।”

आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने बताया कि बेन गुरियन एयरपोर्ट अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंच चुका है और अब वह एक और रिफ्यूलिंग विमान को भी संभालने की स्थिति में नहीं है।

इससे पहले सोमवार को इजरायल के चैनल-12 ने बताया था कि बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिका के 33 रिफ्यूलिंग विमान तैनात किए गए हैं। ऐसी चिंता भी जताई जा रही है कि वॉशिंगटन इस एयरपोर्ट पर और विमान भेज सकता है।

अनुमान है कि अगर सात और विमान पहुंचते हैं और कुल संख्या 40 हो जाती है, तो अगस्त की शुरुआत से रोजाना करीब 30 उड़ानें रद्द करनी पड़ सकती हैं। इससे लगभग 5,000 यात्रियों के टिकट प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी सेना ने मंगलवार (अमेरिकी समय) शाम 8:15 बजे ईरान पर लगातार 11वीं रात सैन्य हमले किए।

सेंटकॉम के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री सैन्य क्षमताओं से जुड़े ठिकाने, सैन्य विमानों के हैंगर, ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा न हो।