मुंबई, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। एंटीलिया विस्फोटक मामले में नया मोड़ आ गया है। रिटायर्ड एसीपी भीमराज घाडगे की ओर से पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह को सह-आरोपी बनाने की मांग वाली याचिका पर शनिवार को एनआईए कोर्ट में करीब एक घंटे तक जोरदार बहस हुई। घाडगे के वकील निलेश ओझा ने परमबीर सिंह पर कोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल कर न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और अदालत को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया।
रिटायर्ड एसीपी भीमराज रोहिदास घाडगे के वकील निलेश ओझा ने कहा, “आज एनआईए कोर्ट में पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त भीमराज घाडगे द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई थी, जिसमें परमबीर सिंह को एंटीलिया मामले में सह-आरोपी बनाने की मांग की गई थी। हस्तक्षेप याचिका के जवाब में परमबीर सिंह ने एक जवाबी हलफनामा दायर किया, जिसमें दो बड़ी गलतियां और झूठे बयान दिए गए थे।”
उन्होंने कहा कि इस पर हमारी लगभग एक घंटे तक बहस हुई। हमने कोर्ट को बताया कि जब सीआरपीसी की धारा 340 (अब बीएनएसएस की धारा 379) के तहत कोर्ट के समक्ष सुनवाई/जांच के दौरान धोखाधड़ी की जाती है, तो आरोपी को बोलने का कोई अधिकार नहीं होता है और हमारे मामले में आरोपी परमबीर सिंह हैं, तो उन्होंने यह हलफनामा क्यों दाखिल किया जब कोर्ट ने उनसे इसकी मांग भी नहीं की थी?
निलेश ओझा ने कहा कि ऐसा करके उन्होंने कानूनी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए स्थापित कानून के खिलाफ जाकर इन्होंने हलफनामा दाखिल किया है। परमबीर सिंह और उनके वकील दोनों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट को कोर्ट के अपमान का रिफरेंस भेजा जाए।
निलेश ओझा ने कहा, “परमबीर सिंह पूरे षड्यंत्र, साजिश और जो कुछ भी हुआ उसके मुख्य मास्टरमाइंड थे। सचिन वाजे मामले को लेकर हमने सीबीआई को हलफनामा सौंपा है, अब एक अधीनस्थ अधिकारी अपने वरिष्ठ की अनुमति के बिना इतने बड़े काम कैसे कर सकता है?”
उन्होंने कहा कि परमबीर सिंह ही सचिन वाजे को वापस फोर्स में लाए और उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का प्रमुख बनाया। दिशा सालियान के केस, सुशांत के केस की जांच और अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी के दौरान ये सभी लोग एक साथ थे।
