नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी), आईवीएफ क्लीनिक और महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की।
इस दौरान एआरटी और आईवीएफ सेवाओं से जुड़े नैतिक, कानूनी, नियामक और चिकित्सा पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में न्यायपालिका, चिकित्सा, कानून, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने एआरटी और आईवीएफ सेवाओं से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों पर अपने सुझाव दिए और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक संतुलित, जवाबदेह और अधिकार आधारित नियामक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।
राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से गठित इस विशेषज्ञ समिति में जस्टिस (रिटायर्ड) आशा मेनन, रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी सुंदरी नंदा, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ. अर्चना मजूमदार, आयोग की सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. शिप्रा धर, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी, सफदरजंग अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सर्वेश टंडन, एम्स नई दिल्ली की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नीता सिंह, सोशल वर्कर डॉ. नयना सहस्रबुद्धे, फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. रजनीकांत कॉन्ट्रैक्टर और राष्ट्रीय महिला आयोग की वरिष्ठ समन्वयक कंचन खट्टर शामिल हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) की एआरटी और सरोगेसी डिवीजन की वैज्ञानिक सी ऋचा सक्सेना ने भी बैठक में मंत्रालय का प्रतिनिधित्व किया।
विशेषज्ञ समिति ने एआरटी और आईवीएफ सेवाओं की गहन समीक्षा के लिए तीन अलग-अलग विशेषज्ञ समूह बनाए हैं। ये समूह इन सेवाओं के नैतिक, कानूनी, नियामक और चिकित्सा पहलुओं का अध्ययन करेंगे।
नैतिकता समूह महिलाओं के प्रजनन अधिकारों से जुड़े मुद्दों की जांच करेगा। इसमें मरीजों की सहमति, प्रजनन से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता, निजता और गोपनीयता, डोनर प्रबंधन, भ्रूण से जुड़े मामलों और किसी भी तरह के शोषण को रोकने जैसे विषय शामिल होंगे।
कानूनी और नियामक समूह एआरटी और आईवीएफ सेवाओं को नियंत्रित करने वाले मौजूदा कानूनों और नियमों की समीक्षा करेगा। यह समूह नियमों के पालन में आने वाली कमियों की पहचान कर जरूरी सुधारों का सुझाव देगा।
वहीं, चिकित्सा और सुरक्षा समूह एआरटी और आईवीएफ सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं, प्रयोगशाला मानकों, मरीजों की सुरक्षा, रिकॉर्ड प्रबंधन, जैविक पहचान और बेहतर चिकित्सा पद्धतियों की समीक्षा करेगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य एआरटी और आईवीएफ सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार बनाना है, ताकि महिलाओं के अधिकारों की बेहतर तरीके से रक्षा की जा सके।

