Friday, August 7, 2026
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एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे आर्चर साहिल जाधव की प्रेरणा बने ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर शेन वॉटसन

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कोलकाता, 7 अगस्त (आईएएनएस)। साहिल जाधव भारतीय आर्चरी का एक उभरता नाम हैं। उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स 2026 में देश के लिए पदक जीतना है। आर्चरी के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करने की प्रेरणा जाधव को किसी आर्चर से नहीं, बल्कि एक क्रिकेटर से मिली है। ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज ऑलराउंडर रहे शेन वॉटसन, साहिल जाधव की प्रेरणा हैं।

साई मीडिया से बातचीत करते हुए जाधव ने कहा, “मैंने लगभग एक महीने पहले शेन वॉटसन की ‘द विनर्स माइंडसेट’ नाम की एक किताब पढ़नी शुरू की थी। मेरा शुरुआती इरादा अपने फोन पर स्क्रॉल करने में लगने वाले समय को कम करना था। मुझे दबाव से निपटने और प्रतियोगिता के दौरान खुद को फोकस रखने के बारे में कीमती जानकारी मिली है।”

25 साल के जाधव को अपना पहला राष्ट्रीय खिताब जीतने और भारतीय स्क्वॉड में जगह बनाने से पहले सात साल तक निराशा झेली।

उन्होंने कहा, “मैंने 19 साल की उम्र में तीरंदाजी (आर्चरी) शुरू की। मेरे परिवार ने बहुत सपोर्ट किया। उन्होंने मुझसे ज्यादा त्याग किया है। वे मुश्किल वर्षों में मेरे साथ खड़े रहे और हर तरह से मेरा साथ दिया। मुझे राष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला पदक जीतने में सात साल लगे। यह सब्र और हिम्मत का टेस्ट था क्योंकि हर साल मैं बहुत कम अंतर से चूक जाता था।”

जाधव ने 2024 में अपना पहला राष्ट्रीय पदक जीता। जाधव ने सीनियर नेशनल्स में गोल्ड, फिर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में व्यक्तिगत श्रेणी में गोल्ड और टीम इवेंट में सिल्वर मेडल भी जीता।

उन्होंने कहा, “मैं जब पोडियम पर खड़ा था, तो मैंने अपने माता-पिता, उनके त्याग और पिछले कुछ सालों में मुझे जो भी संघर्ष करना पड़ा, उसके बारे में सोचा।”

सतारा के रहने वाले जाधव इस साल अच्छी फॉर्म में हैं। उन्होंने इस साल की शुरुआत में चीन के शंघाई में हुए आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज 2 में पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में कांस्य पदक जीतकर अपने करियर का सबसे बड़ा परिणाम हासिल किया।

उन्होंने कहा, “भारतीय टीम में चयन दुनिया में सबसे मुश्किल है। अगर हम इंडियन टीम में अपनी जगह बना पाए हैं, तो इसका मतलब है कि हममें दुनिया के श्रेष्ठ खिलाड़ियों को हराने की क्षमता है। हालांकि, कभी-कभी हमारे आर्चर दबाव में हार जाते हैं, छोटी-मोटी गलतियां कर देते हैं या एक-दो पॉइंट से पीछे हो जाते हैं। हमने इस तरह से तीन वर्ल्ड कप में कांस्य पदक गंवाए हैं। अगले महीने जापान के आइची-नागोया में शुरू होने वाले एशियन गेम्स 2026 में दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसी वैश्विक आर्चरी पावरहाउस को हराने के लिए ‘छोटी-छोटी’ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। हम अपना 100 प्रतिशत देते हैं, तो परिणाम बेहतर होंगे।”

एशियन गेम्स पर फोकस कर रहे जाधव फिलहाल अभी कोलकाता में साई के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ईस्टर्न सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “यहां के हालात ट्रेनिंग के लिए एकदम सही हैं। मैं पिछले 3-4 सालों से साई में ट्रेनिंग कर रहा हूं। हम साई के बहुत एहसानमंद हैं क्योंकि वे हमारी ट्रेनिंग, रहने की जगह, खाना, उपकरण और दूसरी सुविधाओं का ध्यान रखते हैं। मेरी अंतरराष्ट्रीय सफलता में साई का अहम योगदान है।”