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असम: गुवाहाटी में 20 अक्टूबर से शुरू होगा 8 दिवसीय ‘शिल्प समागम मेला 2026’

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गुवाहाटी, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। असम की राजधानी गुवाहाटी में 21 अक्टूबर से 8 दिवसीय ‘शिल्प समागम मेला 2026’ शुरू होगा। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित यह मेला बुधवार, 28 अक्टूबर तक चलेगा।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गुवाहाटी के खानापारा स्थित फार्म गेट पर यह मेला सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले लोग तरह-तरह के पारंपरिक उत्पादों को देख सकेंगे, उन्हें खरीद सकेंगे और कारीगरों की सहायता कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि यह मेला देश भर के कारीगरों को एक मंच पर लाएगा, जिनमें पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगर भी शामिल होंगे। यहां भारत की पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की समृद्ध और विविध विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि इस मेले में कुल 75 कारीगर हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 31 महिला कारीगर शामिल हैं। वे यहां हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की लगभग 40 किस्में प्रदर्शित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह आयोजन कारीगरों को अपने उत्पाद दर्शकों को सीधे दिखाने और बेचने, संभावित ग्राहकों के साथ संबंध स्थापित करने और अपनी बाजार पहुंच बढ़ाने के अवसर तलाशने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। उन्होंने आगे कहा कि कारीगरों और उपभोक्ताओं के बीच सीधे संवाद को बढ़ावा देकर, यह मेला बाजार तक पहुंच को मजबूत करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और इसमें भाग लेने वाले कारीगरों के लिए आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाने का प्रयास करता है।

अधिकारी ने बताया कि गुवाहाटी संस्करण में भारत के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी पारंपरिक शिल्प और हथकरघा उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों के कारीगरों की भागीदारी से, दर्शकों को भारत की कलात्मक परंपराओं, स्थानीय कारीगरी और सांस्कृतिक विरासत की विविधता को समझने और सराहने का मौका मिलेगा।

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य उन कारीगरों के कौशल और रचनात्मकता को सम्मान और सराहना दिलाना भी है, जिनके काम से पारंपरिक ज्ञान और शिल्प परंपराओं को संरक्षित रखने में मदद मिलती है।

अधिकारी ने आगे बताया कि इस मेले का मुख्य फोकस ‘भारत-ट्यूलिप’ (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम) को बढ़ावा देना होगा। इस पहल का उद्देश्य लक्षित समूहों के कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को दुकानों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए बाजार तक पहुंचाने में मदद करना है। बड़े बाजारों और डिजिटल माध्यमों तक पहुंच बढ़ाकर, यह पहल बाजार के संबंधों को मजबूत करने, ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने और कारीगरों के लिए अपनी कमाई बढ़ाने के नए अवसर पैदा करने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि यह कारीगरों और उनके उत्पादों को बदलते उपभोक्ता बाजारों से जोड़कर, पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में भी मदद करता है।

शिल्प समागम मेला (एसएसएम-2026) अपने तीन राष्ट्रीय निगमों: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी), और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त और विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) से जुड़े कारीगरों और लाभार्थियों को विपणन सहायता प्रदान करने के लिए मंत्रालय की एक महत्वपूर्ण पहल है।

एसएसएम-2026 का पहला संस्करण 19 अक्टूबर को मैसूर में संपन्न हुआ। कर्नाटक के मैसूर स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित इस नौ दिवसीय मेले में हजारों दर्शकों की भीड़ उमड़ी।

यह मेला माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर, अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), सफाई मित्र और विमुक्त जनजाति (डीएनटी) से संबंधित कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। यह इन समुदायों को अपने कौशल दिखाने, अपने उत्पादों का विपणन करने और स्थायी आजीविका के अवसरों के माध्यम से अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान करता है।

पारंपरिक उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के अलावा, यह मेला आने वाले लोगों और इसमें भाग लेने वाले समुदायों के बीच मंत्रालय और उसके तीन राष्ट्रीय निगमों द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी, वित्तीय सहायता और विकास योजनाओं के बारे में जागरूकता पैदा करने में मदद करेगा। अधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य वित्तीय और विकासात्मक सहायता के साथ-साथ बाजार-उन्मुख कदम उठाना है, ताकि कारीगर अपनी पारंपरिक कला और कौशल को आजीविका के एक बेहतर अवसर में बदल सकें।

यह उल्लेखनीय है कि ‘शिल्प समागम मेला’ जैसी पहलों के माध्यम से, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वंचित समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अपने प्रयास जारी रखे हुए है। इसके तहत मंत्रालय उद्यमिता को बढ़ावा देता है, बाज़ार तक पहुंच आसान बनाता है और संवहनीय आजीविका के लिए सहायता प्रदान करता है।

इस मेले में भाग लेने वाले कारीगरों की पहचान बढ़ने, उनके उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ने और भारत की समृद्ध हथकरघा एवं हस्तशिल्प परंपराओं के साथ लोगों के जुड़ाव को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।