नई दिल्ली, 8 नवंबर (आईएएनएस)। बाबरी मस्जिद विध्वंस पर सोनिया गांधी की टिप्पणी को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव और प्रवक्ता मौलाना यूसुफ अब्बास ने इसे इतिहास का काला दिन बताया।
मौलाना यूसुफ अब्बास ने कहा, “जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया, तो सिर्फ सोनिया गांधी ही नहीं, बल्कि पूरा देश रो रहा था। बस कुछ ही लोग हंस रहे थे, पूरा देश रो रहा था, न कि सिर्फ सोनिया गांधी। क्योंकि यह देश के संविधान के लिए एक काला दिन था, एक ऐसा दिन जब संविधान के टुकड़े-टुकड़े करके उसे फेंक दिया गया था। मुद्दा किसी इमारत को गिराने या बनाने का नहीं है। मुद्दा भारत के संविधान का है। भारत के संविधान में दिए गए अधिकारों का उल्लंघन किया गया और मस्जिद को गिरा दिया गया। फिर भी, अल्लाह से हमारी यही दुआ है कि किसी भी मां की गोद फिर से न उजड़े और किसी भी महिला का घर बर्बाद न हो। मंदिर और मस्जिद के नाम पर पहले ही बहुत राजनीति हो चुकी है। इसलिए, अब सभी राजनीतिक दलों को गरीबी, बेरोजगारी और शिक्षा की कमी जैसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए।”
पटना में भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “जो लोग समकालीन इतिहास पढ़ते हैं, वे जानते हैं कि आपातकाल (इमरजेंसी) क्या था, सोनिया जी अब तो यह भी कह रही हैं कि इसे संजय गांधी और इंदिरा गांधी ने लागू किया था, इसमें राजीव गांधी की कोई भूमिका नहीं थी। इस तरह, अलग-अलग मुद्दों पर उनकी अलग-अलग भावनाएं सामने आती हैं।”
उन्होंने कहा, “बाबरी मस्जिद के विध्वंस के समय उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन उसी दौरान जब अफगानिस्तान में मुसलमानों द्वारा एक चर्च को तोड़ा जा रहा था, तब उनकी आंखों से आंसू नहीं निकले।”
मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा, “हां, देखिए उन्हें बाबरी मस्जिद पर कितना दर्द होता है। जो कोई बाबरी मस्जिद के लिए आंसू बहाता है, वह कभी भगवान राम का भक्त नहीं हो सकता। जब राम भक्तों पर गोलियां चलाई गईं, तो उनकी आंखों में आंसू नहीं थे। लेकिन जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए।”
मुंबई में एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “6 दिसंबर 1992 का दिन भारत के लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही काला दिन था, हम ऐसा मानते हैं। उस दिन एक साजिश के तहत हमारी बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया था। हमारा आज भी यही मानना है कि जहां एक बार मस्जिद थी, वह कयामत के दिन तक वहीं रहेगी। हालांकि, हमारी मस्जिद के शहीद होने के लिए भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के लोग जितने जिम्मेदार हैं, कांग्रेस भी उससे पीछे नहीं है।”
अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे और चुनावी बयानों पर वारिस पठान ने कहा, “चुनाव को ध्यान में रखते हुए, इन लोगों ने ऐसे बयान दिए हैं। दीपावली एक अच्छा त्योहार है, जिसे हमारे हिंदू भाई बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं। ईद भी मुसलमानों का त्योहार है, सब लोग इसे मिलकर और अच्छे से मनाते हैं। लेकिन ‘ईद दीपावली जैसी है, दीपावली ईद जैसी है’, ऐसे बयानों का आप क्या मतलब निकालेंगे? क्या आपको यह सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट नहीं लगता? क्या यह किसी एक खास समुदाय को लुभाने की कोशिश नहीं है? लेकिन खड़गे जी को यह समझ लेना चाहिए कि अब पूरा समुदाय समझदार हो गया है, और उत्तर प्रदेश के चुनावों में आपको इसका पूरा जवाब मिल जाएगा।”
