मुंबई, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता संदीप देशपांडे ने वडाला ईआरओ कार्यालय में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताई। इसके साथ ही उद्धव ठाकरे की मतदान और विरोध प्रदर्शन के अधिकारों संबंधी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी और दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में उचित कानूनी प्रक्रिया पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और नेपाल जैसी अराजकता की स्थिति भारत में नहीं आ सकती। भारत में चुनाव प्रक्रिया के जरिए सत्ता बदलेगी।
मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कहा, “हम वडाला के ईआरओ ऑफिस गए थे क्योंकि हमारे एक पदाधिकारी का नाम एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया था। हमने ईआरओ को अपने पास मौजूद सभी सबूत दिखाए। पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र दिखाए, जो एसआईआर ड्राफ्ट सूची में नाम जुड़वाने के लिए जरूरी होते हैं। जब हमने उन्हें ये सबूत दिखाए, तो उन्होंने कहा, ‘ठीक है, हम आपके द्वारा दिए गए सबूतों से संतुष्ट हैं। अब आप फॉर्म 6 भर दीजिए।’ सवाल यह उठता है कि फॉर्म 6 तो नए मतदाताओं के लिए होता है? फॉर्म 6 में एक घोषणा (डिक्लेरेशन) होती है कि ‘फॉर्म 6 भरने से पहले मैं कभी मतदाता नहीं रहा,’ जो कि एक झूठ है। मैं विधानसभा चुनाव में मतदाता था, लोकसभा चुनाव में मतदाता था और पिछले नगर निगम चुनाव में भी मतदाता था, तो फिर मैं ऐसी झूठी घोषणा कैसे कर सकता हूं? ईआरओ से मेरा यही सवाल था।”
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर संदीप पांडे ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हम ऐसी ही लोकतंत्र की उम्मीद करते हैं। डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने भी ऐसे लोकतंत्र की कल्पना नहीं की थी। सरकार हद से अधिक ताकत का इस्तेमाल कर रही है। एक तरफ आप अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लेते हैं और उन्हें कनॉट प्लेस नहीं जाने देते। वहीं दूसरी तरफ, आप कांग्रेस के लोगों को जाने देते हैं लेकिन सीजेपी के लोगों को जाने से रोक देते हैं। वे चाहते हैं कि इस मुद्दे पर विपक्ष बंट जाए। भाजपा यही खेल खेलने की कोशिश कर रही है। वे कुछ लोगों को अनुमति देकर और कुछ को अनुमति न देकर विपक्ष को बांटना चाहते हैं। यह बिल्कुल सही नहीं है और मुझे नहीं लगता कि इस नीति की वजह से विपक्ष बंटेगा।”
उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जो सरकार लोगों से वोट देने और विरोध करने का अधिकार छीन लेती है, उसे बदल देना चाहिए। इस बयान पर संदीप देशपांडे ने कहा, “पहला तरीका है चुनाव, जहां लोग वोट देकर सरकार बदलते हैं। दूसरा तरीका वह है जो बांग्लादेश और नेपाल जैसी जगहों पर हुआ, जहां लोग विरोध-प्रदर्शन के जरिए सरकार बदल देते हैं। तीसरा तरीका वह है जो भाजपा अपनाती है, दूसरी पार्टियों के विधायकों और सांसदों को खरीद लेना और सत्ता बदल देना। हम पहले तरीके में विश्वास करते हैं। हमारा मानना है कि उंगली पर लगने वाला स्याही का निशान ही सत्ता बदल देगा और हम इसी के पक्ष में हैं। बांग्लादेश और नेपाल जैसी अराजकता की स्थिति भारत में नहीं आ सकती, क्योंकि भारत एक सच्चा लोकतांत्रिक देश है और यहां के लोग लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। तो क्या वे सत्ता बदलेंगे? हां, वे सत्ता बदलेंगे लेकिन चुनाव प्रक्रिया के जरिए।”
