नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। चिली के राजदूत जुआन अंगुलो ने जरूरी मिनरल्स के जरिए भारत के ऊर्जा ट्रांजिशन में मदद करने में अपने देश की रणनीतिक भूमिका पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने व्यापार, निवेश और स्वच्छ ऊर्जा में भारत-चिली की मजबूत और बढ़ती पार्टनरशिप पर भी जोर दिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चिली के राजदूत ने एआई, स्पेस और तकनीक के क्षेत्र में भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध और साझेदारी को लेकर कहा, “एआई भविष्य है। हम इस क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के दायरे को देख रहे हैं। कुछ समय पहले ही हमने चिली ओपन लैंग्वेज लॉन्च किया है। हम भी इस क्षेत्र में काफी आगे हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें हम भारत के साथ एक्सप्लोर कर सकते हैं। चिली का मार्केट छोटा है, लेकिन भारत का मार्केट बड़ा है। हालांकि, इस क्षेत्र में काम करने वाले हमारे लोग भी अच्छे खासे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि हमारे उद्यमी एआई का इस्तेमाल करके कई तरह से आर्थिक वृद्धि का काम कर रहे हैं। हमें बड़ी मात्रा में एनर्जी, रिसोर्स और खास तौर से क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत है। एआई का सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए आपको बड़ी मात्रा में एनर्जी की जरूरत होती है।
पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर उन्होंने कहा कि चिली ने पहले भी कहा है कि तेल मार्ग के क्षेत्र में विशेष समाधान की जरूरत है। यह सभी सिस्टम के लिए एक अतिरिक्त दबाव का विषय है। हमारा निर्यात भी तेल कंटेनरों के ट्रांजिट पर निर्भर करता है। हम वर्तमान हालात को लेकर काफी संवेदनशील और चिंतित हैं। हम इस बात से परिचित हैं कि इसकी वजह से महंगाई और मरीन ट्रांसपोर्टेशन की कीमत बढ़ेगी और ये हमारे व्यापार को बुरी तरह से प्रभावित करेगा।
राजदूत ने कहा, “हम कॉपर इंडस्ट्री में भारत की मौजूदगी के लिए ही यहां पर हैं। इस क्षेत्र में हम बहुत ही महत्वपूर्ण प्रोड्यूसर हैं। हमारे पास कॉपर के निर्यात और प्रोडक्शन का अच्छा अनुभव है। चिली की कंपनियां दुनिया की सबसे बड़ी कॉपर माइनिंग में से एक हैं। कॉपर इंडस्ट्री को लेकर भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत भी हुई है। हालांकि, क्या करना है, यह बातचीत का हिस्सा है। यह भारत के लिए जरूरी है और हम उन्हें यह मुहैया कराना चाहते हैं।”
भारत के साथ निवेश और व्यापार को लेकर जुआन अंगुलो ने कहा, “हम अभी एसआईपीए के फ्रेमवर्क को लेकर भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं या कोई दूसरा फ्रेमवर्क इंटरेस्टिंग और म्यूचुअल विन-विन सिचुएशन हो सकता है। यह पार्टनरशिप, यह एसोसिएशन, यह एक साथ जुड़ना, एक साथ काम करना, भारत के एप्लीकेशन को आसान बना सकता है, गारंटी दे सकता है। इसलिए हम इसे चिली कहते हैं ताकि भारत में ऊर्जा ट्रांजिशन को पावर देने में मदद मिल सके क्योंकि भविष्य में, बहुत से उद्योग इसी तरह के होंगे, उन्हें इस तरह के मटीरियल की जरूरत होगी, इस तरह के संसाधन की जरूरत होगी और दीर्घकालिक विकास के लिए, हमें एक भरोसेमंद साझेदार की जरूरत है। दीर्घकालिक नजरिए से हम भारत ऊर्जा सुरक्षा ट्रांजिशन का हिस्सा बनना चाहेंगे।”

