भारत की दस्तावेजी विरासत को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम: गजेंद्र सिंह शेखावत

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नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत की दस्तावेजी विरासत को सहेजने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम।

उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और विरासत को सहेजने के साथ-साथ ‘डिजिटल इंडिया’ को आगे बढ़ाने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता के तहत, देश के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने पोर्टल के माध्यम से 20 करोड़ से अधिक अभिलेखीय पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया है और उन्हें आम जनता के लिए उपलब्ध कराया है।

उन्होंने लिखा कि मिशन मोड में शुरू की गई यह परिवर्तनकारी पहल पारदर्शिता को बढ़ा रही है, शोधकर्ताओं और नागरिकों के लिए पहुंच का विस्तार कर रही है और यह सुनिश्चित कर रही है कि हमारे अमूल्य राष्ट्रीय अभिलेख भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहें।

बता दें कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 30 मार्च को लोकसभा में बताया था कि एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है। इन पांडुलिपियों में कुल 1,46,099 पेज शामिल हैं। यह काम तब किया गया जब इस संस्था को ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों की स्कैनिंग के लिए क्लस्टर सेंटर बनाया गया। उन्होंने बताया था कि सोसाइटी अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर चुकी है, जिनमें कुल 5,72,890 पेज हैं।

उन्होंने बताया था कि संस्था के पास अपना संरक्षण और बाइंडिंग सेक्शन भी है। 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र बनने के बाद से 35,624 पन्नों का संरक्षण और 4,596 दुर्लभ पन्नों की मरम्मत की जा चुकी है। म्यूजियम और आर्काइव सेक्शन में कैटलॉग बनाना एक नियमित प्रक्रिया है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित जवाब में बताया था कि एशियाटिक सोसाइटी में सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं। यहां आग से बचाव के सिस्टम और आपदा से निपटने के नियम मौजूद हैं। उन्होंने कहा था कि संस्था का राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पश्चिम बंगाल सरकार के फायर और इमरजेंसी विभाग और स्थानीय पुलिस से लगातार संपर्क बना रहता है।