नई दिल्ली, 7 जून (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी अमित मालवीय ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को लेकर विपक्ष के आरोपों पर आंकड़ों के साथ पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए भारत और अन्य देशों में एलपीजी की कीमतों का तुलनात्मक विवरण शेयर किया।
अमित मालवीय ने कहा, “हर बार जब एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में मामूली वृद्धि होती है, विपक्ष हंगामा खड़ा कर देता है। लेकिन वह यह नहीं बताता कि आज भी भारत में रसोई गैस दुनिया के सबसे सस्ते दामों में उपलब्ध है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर प्रभावी रूप से सिर्फ 642 रुपये में प्राप्त करते हैं, जबकि इसकी वास्तविक अंतरराष्ट्रीय लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है। सामान्य उपभोक्ता भी 942 रुपये में सिलेंडर खरीद रहा है, जो वास्तविक लागत से लगभग 700 रुपये कम है।”
उन्होंने पड़ोसी देशों में एलपीजी की कीमतों की तुलना करते हुए बताया कि पाकिस्तान में इसकी कीमत 1,046 रुपये, नेपाल में 1,207 रुपये, बांग्लादेश में 1,225 रुपये और श्रीलंका में 1,241 रुपये है। वहीं, विकसित देशों में अमेरिका में एलपीजी की कीमत 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया में 1,765 रुपये और कनाडा में 2,411 रुपये बताई गई है।
भाजपा नेता ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण फरवरी से जून के बीच एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उनका कहना है कि भारत अपनी आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है, फिर भी सरकार ने इस बोझ को सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला।
उन्होंने दावा किया कि घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी का बोझ लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसे सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां वहन कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, 10.58 करोड़ से अधिक उज्ज्वला लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता भी दी जा रही है।
मालवीय ने कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में न तो गैस की कमी हुई और न ही आपूर्ति बाधित हुई। उनके अनुसार, सरकार ने उत्पादन बढ़ाया, वैकल्पिक स्रोतों से आयात सुनिश्चित किया और देशभर में निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी।
उन्होंने कहा कि उज्ज्वला लाभार्थी अंतरराष्ट्रीय कीमत की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत कम कीमत पर गैस प्राप्त कर रहे हैं, जबकि सामान्य उपभोक्ता भी अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 45 प्रतिशत कम भुगतान कर रहा है। उनके अनुसार, भारत में रसोई गैस की कीमत पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि कीमत में थोड़ी वृद्धि क्यों हुई। असली सवाल यह है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद भारत सरकार ने करोड़ों परिवारों को इतनी सस्ती रसोई गैस उपलब्ध कैसे कराई। यही वह सच है जिसे विपक्ष छिपाना चाहता है।

