नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में सेंटर फॉर ज्वाइंट वॉरफेयर स्टडीज (सीईएनजेडेडब्ल्यूएस) की ओर से ‘ट्राइडेंट व्याख्यान’ आयोजित किया गया। इस वर्ष व्याख्यान का विषय ‘राष्ट्र निर्माण में अगली पीढ़ी की क्षमता का इस्तेमाल’ था। दरअसल विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि भविष्य की लड़ाइयां सिर्फ सीमा पर हथियारों से नहीं।
रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक, नवाचार, आत्मनिर्भरता, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आपूर्ति श्रृंखला और नागरिक-सैन्य तालमेल की ताकत से से भविष्य की लड़ाइयां लड़ी जाएंगी। इसलिए भारत अभी से भविष्य के युद्धों की तैयार कर रहा है। ट्राइडेंट व्याख्यान को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने संबोधित किया।
संजय सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। देश का लक्ष्य अब केवल रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है।
उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति आज रक्षा क्षेत्र से लेकर उद्योग, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, कृषि, तकनीक और खेल तक हर क्षेत्र में योगदान दे रही है। देश की सोच अब ‘मेक इन इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की हो गई है। यानी भारत अब आयात पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया के लिए प्रतिस्पर्धी उत्पाद और तकनीक तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए देश को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीकों में अपनी क्षमता और मजबूत करनी होगी। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय लघु, छोटे और मझोले उद्यमों तथा स्वदेशी उद्योगों की बढ़ती भूमिका की सराहना की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक को अपनाना, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता ही मजबूत और सुरक्षित भारत की नींव बनेगी। कार्यक्रम में मौजूद रहे चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा का मतलब केवल देश की सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, समुद्री मजबूती, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा, आपूर्ति श्रृंखला और सूचना की विश्वसनीयता भी शामिल हो गई है।
हाल के सैन्य अनुभवों, विशेषकर ऑपरेशन सिंदूर, का उल्लेख करते हुए उन्होंने संयुक्त योजना और एकीकृत तरीके से अभियानों को अंजाम देने की जरूरत पर जोर दिया। ट्राइडेंट व्याख्यान में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों पर व्यापक चर्चा की।
सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन व अन्य वक्ताओं ने सिविल-मिलिट्री फ्यूजन, मल्टी-डोमेन वॉरफेयर, उभरती तकनीकों, संयुक्तता और भविष्य के युद्धों के लिए भारत की तैयारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार रखे। सैन्य अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदलने वाला है। ऐसे में सेना, उद्योग, स्टार्टअप, वैज्ञानिक संस्थानों और नागरिक क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल भारत की रणनीतिक ताकत को कई गुना बढ़ा सकता है।
कार्यक्रम में हुए मंथन से यह संदेश उभरकर सामने आया कि भारत को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एकीकृत, नवाचार आधारित और दूरदर्शी रणनीति अपनानी होगी। तीनों सेनाओं में संयुक्तता बढ़ाने के साथ-साथ स्वदेशी तकनीक और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करना भी जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयास भारत को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ‘ऐन एरा इन ऑलिव ग्रीन: जनरल अनिल चौहान, ड्यूटी, लीडरशिप एंड लिगेसी’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया।
ट्राइडेंट व्याख्यान ने साफ संदेश दिया कि भविष्य की जंग जीतने के लिए तैयारी सिर्फ रणभूमि पर नहीं, बल्कि प्रयोगशालाओं, उद्योगों, स्टार्टअप और तकनीकी संस्थानों में भी करनी होगी।
