गुवाहाटी, 13 सितंबर (आईएएनएस)। असम की राजधानी गुवाहाटी की पहचान देशभर में मां कामाख्या मंदिर से है, लेकिन शहर के आसपास मौजूद कई धार्मिक स्थल अब पर्यटन के व्यापक नक्शे पर अपनी जगह बना रहे हैं। दाकिनी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित भीमाशंकर धाम इनमें खास है। यहां शिव आराधना के साथ पहाड़ी प्रकृति, हरियाली और प्राकृतिक जलधारा श्रद्धालुओं को अलग अनुभव देती है।
यहां आने वाला हर व्यक्ति केवल पूजा करके लौट जाए, ऐसा जरूरी नहीं। किसी के लिए यह आस्था की यात्रा है, किसी के लिए प्रकृति के बीच कुछ पल बिताने का अवसर और स्थानीय लोगों के लिए यह बढ़ती आवाजाही रोजी-रोटी के नए रास्ते खोलने की संभावना। भीमाशंकर धाम की सबसे आकर्षक विशेषताओं में शिवलिंग पर प्राकृतिक जलधारा से होने वाला जलाभिषेक बताया जाता है। पहाड़ी के बीच से आती जलधारा और उसके नीचे स्थित शिवलिंग का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के अद्भुत मेल का अनुभव कराता है।
स्थानीय धार्मिक परंपरा में इस स्थान को भीमेश्वर धाम और भीमाशंकर के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने भक्तों की रक्षा के लिए राक्षस भीमासुर का संहार किया था। इसी कथा से इस स्थान के नाम को जोड़ा जाता है। असम सरकार के आधिकारिक दस्तावेज में भी “भीमेश्वर धाम द्वादस ज्योतिर्लिंग, पमोही, गोरचुक” को गुवाहाटी के धार्मिक स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। दर्शन करने आए लोगों ने बताया कि धार्मिक पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत यही है कि इसका असर केवल मंदिर की घंटियों और पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहता।
जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है तो उसके साथ स्थानीय परिवहन, चाय-नाश्ते की दुकानों, फूल-प्रसाद, धार्मिक सामग्री, भोजनालय, छोटे होटल और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ती है। एक भक्त ने बताया कि एक श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचने के लिए वाहन लेता है। रास्ते में चाय पीता है, प्रसाद खरीदता है, स्थानीय भोजन करता है और कई बार आसपास के पर्यटन स्थलों तक भी जाता है। यानी एक धार्मिक यात्रा अपने साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था की पूरी छोटी-सी श्रृंखला को सक्रिय कर देती है। यही वजह है कि भीमाशंकर जैसे स्थलों का विकास स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का माध्यम बन सकता है।
टैक्सी चालक से लेकर स्थानीय गाइड, दुकान संचालक, भोजनालय कर्मी, फोटोग्राफर और हस्तशिल्प विक्रेता तक इससे जुड़ सकते हैं। गुवाहाटी और उसके आसपास के युवाओं के लिए धार्मिक पर्यटन केवल नौकरी का अवसर नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर कारोबार खड़ा करने का रास्ता भी बन सकता है। किसी युवा के लिए होमस्टे शुरू करना, किसी के लिए स्थानीय भोजन का छोटा केंद्र खोलना तो किसी के लिए पर्यटकों को आसपास के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों की जानकारी देना आय का जरिया बन सकता है। अगर स्थानीय युवाओं को पर्यटन, आतिथ्य, गाइडिंग, डिजिटल प्रचार और भाषा संबंधी प्रशिक्षण मिले तो वे इस उभरते पर्यटन तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन सकते हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि असम सरकार पर्यटन को सामाजिक-आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम मानती है। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के लिए ‘असम दर्शन’ योजना भी महत्वपूर्ण पहल है। वर्ष 2019-20 में शुरू की गई इस योजना के तहत धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास, प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को विकसित करने और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पर्यटन क्षेत्र में सरकार की कोशिशों का उद्देश्य केवल किसी स्थल का सौंदर्यीकरण करना नहीं, बल्कि उससे स्थानीय समुदाय को जोड़ना भी है।
सड़क, स्वच्छता, पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा और सूचना जैसी सुविधाएं बेहतर होने पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है और इसके साथ स्थानीय कारोबार को भी गति मिल सकती है। अधिकारी ने बताया कि भीमाशंकर धाम की संभावनाएं इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि गुवाहाटी पहले से ही पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख प्रवेश द्वार है। अगर धार्मिक स्थलों को प्रकृति, स्थानीय संस्कृति, खान-पान और हस्तशिल्प के साथ जोड़कर पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जाए तो पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ सकती है।
इसका मतलब है कि एक पर्यटक सिर्फ कुछ घंटे मंदिर में बिताकर वापस न लौटे, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में जाए, स्थानीय भोजन का स्वाद ले, स्थानीय उत्पाद खरीदे और स्थानीय लोगों की सेवाएं ले। स्थानीय पुजारी ने बताया कि भीमाशंकर धाम की कहानी केवल एक धार्मिक स्थल की कहानी नहीं है। यह उस संभावना की कहानी है जिसमें पहाड़ी की प्राकृतिक जलधारा से होता शिवलिंग का अभिषेक श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है और श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही स्थानीय परिवारों के लिए आय की नई धारा खोल सकती है।
जरूरत इस बात की है कि विकास के साथ इस क्षेत्र की प्राकृतिक और धार्मिक पहचान भी सुरक्षित रहे और स्थानीय समुदाय को पर्यटन की मुख्यधारा में भागीदार बनाया जाए। अगर यह संतुलन कायम रहा तो पामोही का भीमाशंकर धाम गुवाहाटी के धार्मिक पर्यटन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनने के साथ आसपास के युवाओं और छोटे कारोबारियों के लिए उम्मीद का नया केंद्र भी बन सकता है। यहां मंदिर में बजती घंटियां सिर्फ आस्था की आवाज नहीं होंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई हलचल की दस्तक भी बन सकती हैं।
–आईएएनएस
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