भोजशाला के फैसले पर काशी में जश्न का माहौल, लोगों ने कहा- ‘उच्च न्यायालय का निर्णय अभूतपूर्व’

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वाराणसी, 15 मई (आईएएनएस)। धार के भोजशाला मामले पर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद काशी में जश्न का माहौल देखने को मिला। ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील मदन मोहन यादव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि भोजशाला मामले में उच्च न्यायालय का निर्णय अभूतपूर्व है।

मदन मोहन यादव ने कहा कि एएसआई को माननीय न्यायालय ने आदेश देकर उसकी रिपोर्ट पर फैसला दे दिया है। ऐसे ही अन्य धार्मिक मामले जो पेंडिंग हैं, उनमें भी कोर्ट को कहना चाहिए कि निर्देश देकर एएसआई सर्वे करा लें और उस रिपोर्ट के आधार पर फैसला दे दें। उच्च न्यायालय के फैसले का हम लोग स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि काशी में जो शिवलिंग मिला है, इसको लेकर कल हम लोग पूजा-पाठ करेंगे।

ज्ञानवापी मामले में पक्षकार डॉ. सोहनलाल आर्य ने कहा कि भोजशाला का फैसला काफी उत्साहजनक है। पूरे विश्व के सनातनियों के लिए यह उत्साह का विषय है। एएसआई की रिपोर्ट को देखते हुए माननीय न्यायालय ने उसे मंदिर करार दिया। ठीक इसी तरह ज्ञानवापी के परिप्रेक्ष्य में जब एएसआई की जांच हुई, शंख, चक्र, गदा, त्रिशूल, और पश्चिमी दीवार को देखते हुए कहा गया कि यह मंदिर ही है। अगर एएसआई को मानते हुए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का फैसला दिया गया, एएसआई को मानते हुए भोजशाला का फैसला दिया गया, तो हम चाहते हैं कि एएसआई रिपोर्ट को मानक मानते हुए ज्ञानवापी का फैसला दिया जाए।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने भोजशाला के फैसले पर कहा कि फैसला हमारे पक्ष में आया है। पक्ष में फैसला आने की उम्मीद थी, क्योंकि वह मंदिर ही था, वाग्देवी का मंदिर और उस समय का दुनिया का सबसे बड़ा गुरुकुल हुआ करता था। राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था। वहां 10 हजार छात्रों को एक साथ पढ़ने की व्यवस्था थी। दुर्भाग्य से आक्रांता ने तोड़ा और उस मंदिर पर मकबरा बनाया गया और मस्जिद का स्वरूप दिया गया।

सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने कहा कि सारे साक्ष्य हमारे पक्ष में थे। वहां बनी कलाकृतियां हिंदू संस्कृति की थी। आक्रांताओं ने जितने मंदिरों को तोड़कर मस्जिदें बनाईं, वो सब हिंदुओं को मिलना चाहिए। हाई कोर्ट का यह फैसला एक नजीर पेश करेगा। इतने कम समय में न्यायालय ने फैसला दिया। हम धन्यवाद देते हैं।