भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत-ईयू समझौता बहुत महत्वपूर्ण : क्रिश्चियन स्टॉकर

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नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच कई एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसके बाद दोनों देशों के प्रमुखों ने अपना संबोधन दिया। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण बताया।

ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने कहा, “मेरा दौरा भारत-ऑस्ट्रिया संबंध के लिए मील का पत्थर है। मैं बहुत खुश हूं और मुझे लगता है कि 40 सालों में पहले फेडरल चांसलर के तौर पर भारत आना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। पीएम मोदी आप 2024 में वियना के दौरे पर आए थे और मैं ये पूरी तरह से कह सकता हूं कि हमारा 75 सालों का जो कूटनीतिक संबंध है, वह काफी मजबूत है। मुझे यहां आमंत्रित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।”

स्टॉकर ने कहा, “मैं अकेले भारत नहीं आया हूं। मैं 60 उच्च स्तर के व्यापारिक नेताओं के साथ आया हूं, जो ऑस्ट्रिया के व्यापार की दुनिया के लिए जरूरी हैं। इस डेलिगेशन का नेतृत्व विदेश मंत्री और ऑस्ट्रिया के इकोनॉमिक चेंबर के उपाध्यक्ष कर रहे हैं। हमारे करीबी राजनीतिक संबंध से हमारे व्यापार को काफी लाभ मिल रहा है। भारत पहले से ही ऑस्ट्रिया के लिए यूरोपीय संघ से इतर अहम व्यापारिक साझेदार है। हमारे द्विपक्षीय व्यापार संबंध सकारात्मक तरीके से विकास कर रहे हैं और पिछले दस सालों में 3 बिलियन यूरो तक पहुंचा है।”

उन्होंने बताया कि 10060 ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारतीय बाजार के मुख्य तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। यह दर्शाता है कि हमारी दोस्ती बहुत गहरी है। भारत की विकास दर काफी दिलचस्प है, जो लगभग 7 फीसदी है। हमारे लिए वह एक अहम रणनीतिक साझेदार है। भविष्य में ऑस्ट्रियाई कंपनियों को भारत के इस डायनेमिक बाजार से और फायदा होगा। आज मैं भारत-ऑस्ट्रिया बिजनेस समिट की शुरुआत करूंगा। यह मंच फैसले लेने वालों को एक साथ लाएगा और भारत-ऑस्ट्रिया कंपनियों के लिए अवसर पैदा करेगा।

भारत-यूरोपीय संघ एफटीए को लेकर उन्होंने कहा, “भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता सकारात्मक विकास को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। यह व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करेगा और निवेश, एक्सपोर्टस और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर पैदा करेगा। भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह समझौता बहुत महत्वपूर्ण है। हमें इन चुनौतियों से बाहर निकलने के लिए अलायंस बनाकर काम करना होगा। हमें निर्भरता कम करने और डायवर्सिफाई करने की जरूरत है। यह बहुत जरूरी है।”