गयाजी, 26 सितंबर (आईएएनएस)। पितरों के मोक्ष की कामना लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों से गयाजी पहुंच रहे श्रद्धालुओं के लिए इस बार आस्था के साथ सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में संचालित ‘जीविका दीदी की रसोई’ श्रद्धालुओं के लिए किफायती, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन का भरोसेमंद ठिकाना बनकर उभरी है। यहां आने वाले पिंडदानियों को उनकी धार्मिक आस्था और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिना प्याज और लहसुन का निरामिष भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
गयाजी की पावन धरती पर पितृपक्ष के प्रथम दिन से ही बड़ी संख्या में पिंडदानियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडवेदी स्थलों पर तर्पण और पिंडदान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से ठहरने और भोजन समेत विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी क्रम में जीविका की दीदियों ने भी अपनी जिम्मेदारी संभाली है।
संचालन कर रही एक जीविका दीदी बताती है कि गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में लगी ‘जीविका दीदी की रसोई’ में चावल-दाल-सब्जी की थाली, पूरी-सब्जी, रोटी-सब्जी और लिट्टी-चोखा महज 30 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए 40 रुपये में दही-चूड़ा, 60 रुपये में स्पेशल थाली और 10 रुपये में चाय उपलब्ध है। पेयजल की बोतलें भी 10 और 20 रुपये की दर से दी जा रही हैं। पितृपक्ष की धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए रसोई में तैयार भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। दही-चूड़ा जैसे पारंपरिक और हल्के भोजन की उपलब्धता भी उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो पिंडदान और तर्पण के दौरान सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं।
इस रसोई का संचालन सहारा जीविका महिला स्वावलंबी सहकारी समिति, चंदौती के अंतर्गत किया जा रहा है। मेले के दौरान जीविका दीदियां अलग-अलग शिफ्ट में स्टॉल का संचालन कर रही हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच भोजन तैयार करने से लेकर उसे परोसने तक की जिम्मेदारी दीदियां खुद संभाल रही हैं। ‘जीविका दीदी की रसोई’ सिर्फ भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि गयाजी में ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भरता के संकल्प की तस्वीर भी पेश कर रही है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हुनर और मेहनत के बल पर न केवल आमदनी अर्जित कर रही हैं, बल्कि बड़े आयोजनों में जिम्मेदारी संभालकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी कर रही हैं।
गयाजी में पितृपक्ष का महत्व सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा से जुड़ा है। मान्यता है कि यहां फल्गु नदी के तट और विभिन्न वेदियों पर पिंडदान एवं तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष पितृपक्ष में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गयाधाम पहुंचते हैं। ऐसे में हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता मेले की व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
इस वर्ष 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाले पितृपक्ष मेले में ‘जीविका दीदी की रसोई’ श्रद्धालुओं को कम कीमत में भोजन उपलब्ध कराने के साथ महिला सशक्तीकरण का संदेश भी दे रही है। गयाजी की आध्यात्मिक धरती पर जहां श्रद्धालु अपने पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं, वहीं जीविका दीदियां अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के जरिए आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं।
