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बिहार की सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को गति देने की मांग, सीएम ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से की मुलाकात

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पटना, 31 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर राज्य की लंबित सिंचाई, जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने तथा केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष कोसी-मेची अंतर्राज्यीय नदी जोड़ परियोजना सहित केंद्र के बजट में घोषित कई योजनाओं की प्रगति का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की ओर से 16,339.18 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन केंद्र को उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन अब तक इनमें केवल दो परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। कोसी-मेची अंतर्राज्यीय नदी जोड़ परियोजना पर विशेष चर्चा हुई। करीब 3,652.56 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य कोसी बेसिन के अतिरिक्त पानी का बेहतर इस्तेमाल कर उत्तर बिहार में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। परियोजना के पहले चरण के लिए 2025-26 में 395.41 करोड़ और 2026-27 में 570 करोड़ रुपये का प्रावधान है। हालांकि, अब तक 156.745 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने शेष राशि जल्द जारी करने और दूसरे चरण के डीपीआर को मंजूरी देने का अनुरोध किया। सम्राट चौधरी ने सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना के लिए केंद्रीय सहायता जल्द उपलब्ध कराने की मांग भी की।

125.08 करोड़ रुपये के केंद्रीय अंश वाली इस योजना की संबंधित केंद्रीय समिति पहले ही अनुशंसा कर चुकी है। इसके अलावा सिंचाई क्षेत्र की तीन और बाढ़ प्रबंधन क्षेत्र की 15 परियोजनाओं की स्वीकृति में तेजी लाने की मांग की गई।

बैठक में पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण की भी समीक्षा हुई। बिहार सरकार ने इसके लिए 8,338.89 करोड़ रुपये का डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 3,484.24 करोड़ रुपये के पहले चरण का काम शुरू कर दिया है और अब केंद्रीय सहायता की अपेक्षा की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट 2026-27 में इंद्रपुरी जलाशय परियोजना, सोन-फल्गु नदी जोड़ परियोजना और सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना के पहले चरण को शामिल करने का आग्रह किया। सारण परियोजना की अनुमानित लागत 1,350.95 करोड़ रुपये है।

उन्होंने फरक्का बराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि से जुड़ी गाद, नदी की धारा में बदलाव और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति तथा समर्पित कोष बनाने की मांग की। साथ ही गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग का मुख्यालय पटना में बनाए रखने पर भी जोर दिया। नेपाल से संबंधित कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना के सर्वेक्षण और डीपीआर कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से उत्तर बिहार को बाढ़ से राहत, सिंचाई विस्तार और जलविद्युत उत्पादन के नए अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के विकास को प्राथमिकता दे रही है। केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से महत्वपूर्ण जल संसाधन परियोजनाओं को जल्द गति मिलने की उम्मीद है।