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बिहार में दुर्गोत्सव में पूजा पंडालों का अनोखा रंग, कहीं 250 फीट ऊंचा पेट्रोनास टावर तो कहीं विशालकाय कॉकरोच थीम ने खींचा ध्यान

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पटना, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। शारदीय नवरात्र को लेकर बिहार में उत्साह चरम पर है। महासप्तमी के अवसर पर दुर्गा पूजा पंडालों के पट खुलते ही मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूजा पंडालों में रविवार को और भीड़ बढ़ने की संभावना है। ढोल-नगाड़ों की गूंज, मंत्रोच्चार, आकर्षक रोशनी और भव्य सजावट के बीच पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। इस बार दुर्गा पूजा में धार्मिक आस्था के साथ कलात्मकता, कल्पनाशीलता और सामाजिक सरोकारों का भी अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

पटना से कटिहार और मुंगेर तक कहीं विश्वप्रसिद्ध इमारतों की प्रतिकृतियां तैयार की गई हैं, तो कहीं प्रकृति, जल संसाधनों और अनोखी कल्पनाओं को पंडालों का स्वरूप दिया गया है। इन पंडालों की भव्यता श्रद्धालुओं के साथ-साथ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को भी आकर्षित कर रही है। कटिहार के विनोदपुर में बना दुर्गा पूजा पंडाल इस बार अपनी अनोखी थीम के कारण खास चर्चा में है। देश की सियासत में ‘कॉकरोच पार्टी’ को लेकर चल रही चर्चा के बीच यहां विशालकाय कॉकरोच और मकड़ी के जालों जैसी सजावट के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है।

पंडाल का यह अलग अंदाज लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर रहा है। हालांकि, आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इस थीम का देश की राजनीति या किसी राजनीतिक टिप्पणी से कोई संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, यह पूरी तरह काल्पनिक अवधारणा है, जिसे उत्सव में आने वाले लोगों और बच्चों के मनोरंजन के उद्देश्य से तैयार किया गया है। राजधानी पटना में भी पंडालों की भव्यता देखते ही बन रही है।

पटना के डाकबंगला चौराहे पर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर की स्थापत्य शैली पर आधारित करीब 80 फीट ऊंचा पंडाल तैयार किया गया है। मंदिर की कलात्मक वास्तुकला से प्रेरित यह संरचना श्रद्धालुओं को धार्मिक विरासत और शिल्पकला की झलक दिखा रही है। पंडाल के पट खुलने के बाद यहां लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। वहीं, बोरिंग रोड स्थित जमुना गली के कस्तूरबा पथ पर श्री श्री सर्वजन दुर्गा पूजा समिति ने फरक्का बराज की भव्य प्रतिकृति बनाई है। करीब 55 फीट ऊंचे और 55 फीट चौड़े इस पंडाल को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसकी थीम बिहार में बाढ़, सुखाड़, नदी कटाव और किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

इस तरह पंडाल केवल पूजा-अर्चना का स्थल नहीं, बल्कि जल संसाधनों और उनसे जुड़ी चुनौतियों को समझने का माध्यम भी बन रहा है। पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित हिमगिरी चौराहे के पास शिवलिंग के आकार का विशाल पंडाल भी आकर्षण का केंद्र है। करीब 100 फीट ऊंचे और 150 मीटर लंबे इस पंडाल को लगभग 20 हजार घंटियों से सजाया जा रहा है। यहां मां दुर्गा की 16 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। पंडाल तक पहुंचने वाले करीब 450 फीट लंबे रास्ते को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है, जिससे शाम होते ही पूरा परिसर भव्य और मनमोहक दिखाई देता है।

उधर, मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड के कल्याणपुर में बड़ी दुर्गा महारानी का दरबार अपनी विशाल संरचना के कारण लोगों को आकर्षित कर रहा है। यहां मलेशिया के प्रसिद्ध पेट्रोनास ट्विन टावर की तर्ज पर करीब 250 फीट ऊंचा पंडाल बनाया गया है। हजारों बांसों और दर्जनों कारीगरों की मेहनत से तैयार इस संरचना की भव्यता देखने के लिए लोगों में खास उत्सुकता है।

बिहार में दुर्गा पूजा के ये पंडाल इस बात की मिसाल हैं कि धार्मिक उत्सव अब परंपरा के साथ कला, वास्तुकला, सामाजिक संदेश और स्थानीय रचनात्मकता को भी समेट रहे हैं। कहीं विशाल इमारतों की प्रतिकृतियां लोगों को चकित कर रही हैं, तो कहीं अनोखी थीम चर्चा बटोर रही है। महासप्तमी से शुरू हुई श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ये पंडाल दुर्गोत्सव को आस्था के साथ-साथ आकर्षण और सामूहिक उत्सव का यादगार अनुभव बना रहे हैं।

–आईएएनएस

एमएनपी/पीएम