SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय बिहार में गंडक नदी उफान पर, वाल्मीकिनगर बराज से 4.79 लाख क्यूसेक...

बिहार में गंडक नदी उफान पर, वाल्मीकिनगर बराज से 4.79 लाख क्यूसेक छोड़ा गया पानी

0
5

पटना, 28 सितंबर (आईएएनएस)। नेपाल के तराई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बिहार में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद गंडक नदी के तटवर्ती इलाकों में स्थिति संवेदनशील हो गई है। सोमवार सुबह नौ बजे गंडक बराज से 4,79,100 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। हालांकि, पिछले दो घंटे के आंकड़ों के आधार पर बराज का डिस्चार्ज गिरता हुआ दर्ज किया गया है।

जल संसाधन विभाग के 28 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, सुबह छह बजे वाल्मीकिनगर गंडक बराज से 5,10,550 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। सात बजे यह घटकर 4,97,200 क्यूसेक हुआ और आठ बजे भी इतना ही रहा। सुबह नौ बजे डिस्चार्ज घटकर 4,79,100 क्यूसेक रह गया।

विभाग ने गंडक बराज के जल प्रवाह का रुझान ‘फॉलिंग’ दर्ज किया है। लगातार भारी डिस्चार्ज के कारण गंडक नदी के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ गया है। पूर्वी चंपारण के अरेराज अनुमंडल के गंडक दियारा और तटीय क्षेत्रों में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। पिछले दो दिनों से नदी में पानी बढ़ने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है।

वहीं, पश्चिम चंपारण के बगहा शहर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। निचले इलाकों और आसपास के गांवों में जलजमाव के साथ-साथ नदी कटाव का खतरा भी बना हुआ है। नदी के तेज बहाव को देखते हुए तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है।

आंकड़ों के मुताबिक, कोसी बराज, वीरपुर से सुबह छह बजे 1,75,395 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो सात बजे 1,80,490 और आठ बजे 1,81,805 क्यूसेक तक पहुंचा। नौ बजे भी डिस्चार्ज 1,81,805 क्यूसेक रहा। कोसी का रुझान ‘स्टेडी’ दर्ज किया गया है। इसी तरह सोन बराज, इंद्रपुरी से सुबह छह बजे 86,157 क्यूसेक, सात बजे 1,36,124 क्यूसेक, आठ बजे 1,29,319 क्यूसेक और नौ बजे 1,21,550 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यहां डिस्चार्ज का रुझान भी ‘फॉलिंग’ दर्ज किया गया है।

जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, तीनों प्रमुख बराजों में गंडक का डिस्चार्ज सबसे अधिक है। गंडक के जलस्तर और डिस्चार्ज में बदलाव को देखते हुए तटवर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। प्रशासन और संबंधित विभाग संवेदनशील इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।