Thursday, June 18, 2026
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बिहार में सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना को गति, मानसून को लेकर सरकार सतर्क : नीतीश मिश्रा

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पटना, 18 जून (आईएएनएस)। बिहार सरकार ने राज्य में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य के मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि बिहार कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि जिन क्षेत्रों में नए सैटेलाइट शहर विकसित किए जा रहे हैं, वहां जरूरतमंद भूस्वामियों से बिहार आवास बोर्ड (हाउसिंग बोर्ड) सीधे जमीन खरीदेगा और उन्हें निर्धारित नीति के अनुसार समय पर मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह फैसला उन किसानों और जमीन मालिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्हें तत्काल आर्थिक जरूरतों के कारण अपनी भूमि बेचने की आवश्यकता पड़ सकती है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि अप्रैल महीने में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बिहार के 11 स्थानों पर सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया गया था। इसके तहत सात टाउनशिप क्षेत्रों में 31 मार्च 2027 तक भूमि की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे, ताकि योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्य आगे बढ़ाया जा सके। सरकार को यह फीडबैक मिला कि कई भू-स्वामियों को आकस्मिक जरूरतों के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में सरकार ने व्यवस्था की है कि जो भूमि मालिक अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, उनकी जमीन बिहार आवास बोर्ड खरीदेगा और उन्हें राजस्व विभाग की वर्ष 2026 की भूमि खरीद नीति के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद भू-स्वामियों को समय पर भुगतान मिल सके। इसके लिए आवास बोर्ड को अधिकृत किया गया है। इच्छुक भूमि मालिकों को आवेदन देना होगा, जिसके बाद आवास बोर्ड उनकी जमीन खरीदकर निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान करेगा। इस फैसले से भू-स्वामियों को बेहतर दरें मिलेंगी और भुगतान की प्रक्रिया भी तेज होगी। सरकार को उम्मीद है कि आवास बोर्ड इस व्यवस्था के तहत समयबद्ध तरीके से भुगतान करने में सक्षम होगा।

नीतीश मिश्रा ने बताया कि मंत्रिपरिषद की हालिया बैठक में प्रारंभिक प्रस्ताव में तीन महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। पहला, जिन भू-स्वामियों को आकस्मिक परिस्थितियों में धन की आवश्यकता होगी, उन्हें आवास बोर्ड के माध्यम से भुगतान किया जाएगा और उनकी जमीन खरीदी जाएगी। दूसरा, केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए यदि भूमि की आवश्यकता होती है तो ऐसे मामलों को प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा गया है, ताकि विकास परियोजनाएं प्रभावित न हों। तीसरा, उद्योग विभाग के स्टेट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड से स्वीकृत औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और खरीद को भी रोक से मुक्त रखा गया है। इससे राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं, मानसून की तैयारियों को लेकर सवाल किए जाने पर मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और सभी नगर निकायों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जलजमाव की समस्या को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। यदि कहीं जलभराव या अन्य समस्या की सूचना मिलती है तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। सोशल मीडिया पर मिलने वाली शिकायतों पर भी नजर रखी जा रही है और संबंधित अधिकारियों से तुरंत जवाब मांगे जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि पटना नगर निगम सहित बिहार के सभी शहरी निकायों को पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जहां पानी जमा हो रहा है, वहां तत्काल निकासी की व्यवस्था की जाए। जो परियोजनाएं अधूरी हैं, उन्हें जल्द पूरा किया जाए और भविष्य में जलजमाव रोकने के लिए नई योजनाएं भी तैयार की जाएं। विभागीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है और नगर निकायों को आवश्यक संसाधन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

पटना में गिग वर्कर्स के लिए बनाए गए एसी लॉन्ज को लेकर भी मंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह लगभग तैयार है और अगले कुछ दिनों में औपचारिक शुरुआत होने की उम्मीद है। बिहार में गिग वर्कर्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों तक सामान और सेवाएं पहुंचाते हैं और उन्हें अत्यधिक गर्मी, बारिश तथा कड़ाके की ठंड जैसी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। दो गिग वर्कर्स लॉन्ज बनाए गए हैं, जिनका शुरुआती अनुभव सकारात्मक रहा है। यदि इनका संचालन सफल रहता है और अच्छा फीडबैक मिलता है, तो भविष्य में राज्य के अन्य शहरों में भी इसका विस्तार किया जाएगा।