पटना, 28 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र विधान परिषद के उपसभापति प्रो. रामवचन राय को सौंपा। इसके साथ ही परिषद के सभापति का पद रिक्त हो गया है।
अवधेश नारायण सिंह भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद हैं और गया स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। अवधेश नारायण सिंह ने अपने त्यागपत्र में कहा कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था और राज्य में पार्टी संगठन के विभिन्न पदों पर काम करते हुए संगठन के विस्तार में भूमिका निभाई।
उन्होंने इस राजनीतिक यात्रा में केंद्र से लेकर राज्य तक के नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिले सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन सरकार में उन्हें चार बार विधान परिषद का सभापति बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उन्होंने सभापति के रूप में अपने कार्यकाल में मिले सहयोग के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का भी आभार जताया।
उन्होंने त्यागपत्र में विधान परिषद के सभी सदस्यों, सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि वह तीन दशक से अधिक समय से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभापति पद से हटने के बाद भी वह विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब नए सभापति के निर्वाचन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सत्ता पक्ष में यह चर्चा है कि सभापति का पद जनता दल (यूनाइटेड) के हिस्से में जा सकता है। मौजूदा उपसभापति प्रो. रामवचन राय का नाम नए सभापति के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
बता दें कि बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम भी घोषित हो चुका है। इन सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को प्रस्तावित है। ऐसे समय में सभापति पद से अवधेश नारायण सिंह का इस्तीफा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नए सभापति के नाम को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विधान परिषद की अगली कमान किसे सौंपी जाती है।
