Monday, August 24, 2026
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बीपीएससी ने टीआरई-4 परीक्षा को लेकर दूर किया भ्रम, पांच लाख तक आवेदन पर एक दिन में परीक्षा

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पटना, 24 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 के परीक्षा पैटर्न को लेकर चल रही चर्चाओं और अफवाहों पर सोमवार को स्थिति स्पष्ट कर दी। आयोग ने कहा कि परीक्षा दो चरणों में आयोजित करने के निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यदि अभ्यर्थियों के आवेदन की संख्या पांच लाख तक रहती है, तो परीक्षा एक ही दिन में आयोजित की जाएगी। पांच लाख से अधिक आवेदन आने पर परीक्षा दो अलग-अलग तिथियों में कराई जाएगी।

परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि दो चरणों में परीक्षा कराने का निर्णय केवल बिहार तक सीमित नहीं है। देश के कई आयोग और राज्य पहले से ही दो या तीन चरणों में परीक्षाएं आयोजित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों में ऐसी व्यवस्था लागू है। उन्होंने कहा कि बीपीएससी ने भी अब अपनी परीक्षाओं को कम से कम दो चरणों में कराने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बताया कि परीक्षा में पारदर्शिता और कदाचार रोकने के उद्देश्य से आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) से भी कई सुझाव प्राप्त हुए हैं। इनमें परीक्षाओं को कम से कम दो चरणों में आयोजित करने का सुझाव शामिल है। आयोग ने विचार के बाद इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा के बाद गठित राधाकृष्णन समिति ने भी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दो चरणों की व्यवस्था का सुझाव दिया था।

नकारात्मक अंकन को लेकर उठ रहे सवालों पर भी आयोग ने स्थिति स्पष्ट की। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि बीपीएससी की सभी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में नकारात्मक अंकन का प्रावधान है और यह सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होता है। इसका उद्देश्य अनुमान के आधार पर उत्तर देकर चयन की संभावना को कम करना है। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम अंक दिए जाने के आरोपों को भी आयोग ने खारिज किया।

उन्होंने कहा कि मुख्य परीक्षा का आवेदन भरते समय अभ्यर्थियों से माध्यम संबंधी जानकारी ली ही नहीं जाती, इसलिए आयोग के पास हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के आधार पर तुलना करने का कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञ करते हैं और एक प्रश्न का मूल्यांकन एक ही परीक्षक करता है, चाहे उत्तर हिंदी में लिखा गया हो या अंग्रेजी में।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 60 प्रतिशत से अधिक अंक देने पर कोई रोक नहीं है। हालांकि, 60 प्रतिशत से अधिक अंक दिए जाने पर उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच हेड एग्जामिनर द्वारा की जाती है। इसका उद्देश्य मूल्यांकन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग ने टीआरई-3 की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर उठे सवालों पर भी उदाहरण प्रस्तुत किया।

परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि तीसरे स्थान पर रहे अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका में जीएस-1 के प्रश्न संख्या सात के दो उपभागों का उत्तर नहीं दिया गया था और उन दोनों में उसे शून्य अंक मिले। उन्होंने कहा कि केवल उत्तर पुस्तिका दिखाने से नहीं, बल्कि उत्तर की गुणवत्ता से अंक निर्धारित होते हैं।

–आईएएनएस

एमएनपी/पीएम