नई दिल्ली, 15 मई (आईएएनएस)। भारत में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में यूएई के राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार ने ईरान का खुलकर विरोध किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यूएई, ईरान की ओर से लगाए गए आरोपों और उन हमलों को सही ठहराने की कोशिशों को पूरी तरह खारिज करता है, जो यूएई और क्षेत्र के अन्य देशों पर किए गए। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी कहा कि यूएई अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वतंत्र फैसले लेने के अधिकार के खिलाफ किसी भी तरह के आरोप या धमकी को बिल्कुल स्वीकार नहीं करता। साथ ही यूएई को किसी भी खतरे, आरोप या दुश्मनी भरे कदम का जवाब देने का पूरा कानूनी, कूटनीतिक और सैन्य अधिकार है।
उन्होंने कहा कि दबाव बनाने की कोशिशें, झूठे आरोप या गलत दावे यूएई की मजबूत नीतियों को कमजोर नहीं कर सकते और न ही देश को अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और स्वतंत्र निर्णयों की रक्षा करने से रोक सकते हैं।
अल मरार ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से यूएई लगातार और बिना किसी उकसावे के ईरान के हमलों का सामना कर रहा है। यूएई की वायु रक्षा प्रणाली ने लगभग 3,000 हमलों को रोका है, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और ड्रोन शामिल थे। इन हमलों का निशाना जानबूझकर नागरिक सुविधाएं और महत्वपूर्ण ढांचा था, जैसे एयरपोर्ट, बंदरगाह, तेल सुविधाएं, पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट, ऊर्जा नेटवर्क, सेवा केंद्र और रिहायशी इलाके।
उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर कई प्रस्तावों और निंदा के बावजूद, ईरान ने यूएई और क्षेत्र के अन्य देशों पर अपने आतंकवादी हमले जारी रखे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सहमति की खुली अनदेखी है। इनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2817 (2026) भी शामिल है, जिसे 136 देशों का समर्थन मिला था। इसके अलावा, 25 मार्च 2026 को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में भी ईरानी हमलों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।
अल मरार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार ईरान के हमलों की निंदा करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की मरीन एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन कमेटी ने एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें ईरान से तुरंत व्यापारिक जहाजों और महत्वपूर्ण बंदरगाह ढांचे पर हमले या धमकियां बंद करने की मांग की गई। वहीं, अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की परिषद ने नागरिक दूरसंचार और आईसीटी ढांचे को निशाना बनाने वाले हमलों की सर्वसम्मति से निंदा की। इसी तरह, खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की परिषद ने भी खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालने वाली ईरान की गतिविधियों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।
अल मरार ने कहा कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में रुकावट डाली है, जिसमें दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को लगभग बंद कर देना भी शामिल है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के तौर पर करना समुद्री डकैती जैसा कदम है और इससे पूरे क्षेत्र, वहां के लोगों और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा होता है।
खलीफा शाहीन अल मरार ने कहा कि यूएई किसी दूसरे देश से सुरक्षा नहीं मांगता और इस बिना उकसावे वाले हमले का जवाब देने और इसे रोकने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत यूएई को अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अपने नागरिकों, निवासियों और आगंतुकों की सुरक्षा के लिए पूरा और वैध अधिकार प्राप्त है।

