नई दिल्ली, 12 सितंबर (आईएएनएस)। ब्रिक्स समूह की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता के बीच संयुक्त राष्ट्र ने उसके महत्व को स्वीकार किया है। यूएन ने माना कि बदलते विश्व क्रम में विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के लिए ब्रिक्स जैसे मंचों की भूमिका अहम हो गई है। इसी क्रम में यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने वित्तीय और व्यापारिक असमानताओं को दूर करने के साथ आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत पर बल दिया।
ब्रिक्स के संदर्भ में यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा के लिए यह जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में व्यापक सुधार किया जाए और वैश्विक व्यापार व्यवस्था को ज्यादा न्यायसंगत बनाया जाए, जिससे वह किसी खास देश समूह के पक्ष में न झुके और सभी को बराबर अवसर मिले।
यूएन महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि महासचिव गहन बहुपक्षवाद के समर्थक हैं और चाहते हैं कि देश आपसी तनाव कम करने के लिए क्षेत्रीय समूहों के बीच सकारात्मक समझौते करें। उन्होंने कहा कि वैश्विक आबादी और जीडीपी के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के नाते ब्रिक्स की भूमिका बेहद अहम है और भारत की अध्यक्षता पुल बनाने के साथ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार को आगे बढ़ाने के लिहाज से काफी सकारात्मक रही है।
उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद एक वैश्विक खतरा है, जिससे सभी देशों को मिलजुलकर लड़ना होगा। संयुक्त राष्ट्र के पास इसके लिए कई संस्थाएं और कार्यक्रम हैं जो सदस्य देशों की मदद करते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि इसका असर दुनिया के हर देश पर पड़ता है।
वहीं, पीपुल्स डेली के इंटरनेशनल न्यूज विभाग के संपादक मेंग शियांगलिन ने कहा कि ब्रिक्स एक बड़ा परिवार है जिसमें 11 प्लस 10 सदस्य हैं और अगली अध्यक्षता चीन की होगी, जिसकी घोषणा हमारे राष्ट्रपति ने अभी की है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन की उनकी यादें बेहद शानदार रही हैं।
अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन की अध्यक्षता को लेकर पीपुल्स डेली के संपादक मेंग शियांगलिन ने कहा कि यह एक गतिशील और चुनौतीपूर्ण समय है। पीएम मोदी को बहुत कुछ संभालना पड़ा। घोषणापत्र एक बात है और असली फैसले और उनका क्रियान्वयन दूसरा पहलू है। चीजें योजना के मुताबिक भी हो सकती हैं और अलग भी, क्योंकि माहौल बहुत गतिशील है। हमें दीर्घकालिक सोचना होगा, इस लिहाज से जनवरी से शुरू होने वाली चीन की अध्यक्षता का समय काफी अहम है।
इसके अलावा, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी के यूएन को लेकर दिए बयान पर विंग कमांडर प्रफुल बख्शी (रिटायर्ड) ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतिनिधित्व सबसे छोटे देश तक पहुंचना चाहिए और सबकी भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम इस तरह बनाए जाएं कि उनका असर ज्यादा हो, सिर्फ तीन-चार बड़े देशों पर निर्भरता न रहे। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए गहन मंथन और कई बैठकों की जरूरत होगी, यह रातों-रात नहीं होगा। संयुक्त राष्ट्र को नया स्वरूप देना बहुत बड़ा काम है, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स में यह मुद्दा उठाया है, इस पर चर्चा होगी और आगे प्रगति होगी।
समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने और सप्लाई चेन को खुला बनाए रखने की पीएम मोदी की अपील पर विंग कमांडर प्रफुल बख्शी (रिटायर्ड) ने कहा कि यहां समुद्री आवाजाही की बात हो रही है। चर्चा हॉर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को लेकर है, जहां से दुनिया का 25 से 30 फीसदी तेल और 60 फीसदी वैश्विक व्यापार गुजरता है। दक्षिण-पूर्व एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था तभी चलेगी जब यह पश्चिमी देशों से जुड़ी रहेगी, इसके बिना व्यापारिक लेन-देन संभव नहीं है।
