नई दिल्ली, 17 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में लागू की गई ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ यानी ओएसएम प्रणाली को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। दरअसल परिणाम घोषित होने के बाद से बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों द्वारा इस प्रणाली को लेकर शिकायत की जा रही है।
वहीं सीबीएसई बोर्ड ने यह स्वीकार किया कि 68 हजार से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं को खराब स्कैनिंग गुणवत्ता के कारण दोबारा स्कैन करना पड़ा। वहीं लगभग 13,583 उत्तर पुस्तिकाओं की गुणवत्ता लगातार खराब पाई गई। परिणाम में देरी और छात्रों की चिंता को देखते हुए इन कॉपियों का मूल्यांकन मैन्युअल तरीके से कराया गया और उसके अंक प्रणाली में अपलोड किए गए।
परिणामों के विश्लेषण में पाया गया कि वर्ष 2026 में कुल उत्तीर्ण प्रतिशत और औसत अंक में मामूली गिरावट दर्ज हुई है। भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और लेखा जैसे विषयों में उच्च ग्रेड के लिए आवश्यक कट-ऑफ कुछ अंकों तक नीचे गई है।
मंत्रालय का कहना है यह माना जा रहा है कि परीक्षक इस बार विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार मार्किंग स्कीम का अधिक सख्ती से पालन कर रहे थे। परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने शिकायत की कि खराब स्कैनिंग के कारण कई उत्तर स्पष्ट दिखाई नहीं दिए, जिससे अंक प्रभावित हुए। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि चरणबद्ध अंकन प्रणाली के कारण वैकल्पिक या शॉर्टकट विधियों से हल किए गए उत्तरों को पर्याप्त अंक नहीं मिले। विशेष रूप से गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान विषयों को लेकर अधिक शिकायतें सामने आईं।
मंत्रालय के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2026 में कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में ओएसएम प्रणाली को लागू किया गया। हालांकि परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से कई सवाल उठाए गए, जिन पर बोर्ड ने विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है और पुनर्मूल्यांकन की विशेष व्यवस्था भी शुरू की है।
मंत्रालय ने बताया कि ऑन स्क्रीन मार्किंग को दुनियाभर में मानकीकृत मूल्यांकन की प्रभावी तकनीक माना जाता है। इससे जोड़-घटाव और टेबुलेशन की गलतियां खत्म होती हैं, हर उत्तर का मूल्यांकन सुनिश्चित होता है और निर्धारित मार्किंग स्कीम के अनुसार एकरूपता बनी रहती है। इसके अलावा परिणाम तैयार होने में समय कम लगता है, प्रशासनिक बोझ घटता है और पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनती है। भारत में कई विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थान पहले से इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। कई राज्य शिक्षा बोर्ड भी इसे अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विभिन्न मूल्यांकन एजेंसियां और कई देशों की परीक्षा प्रणालियां इस तकनीक का व्यापक उपयोग करती हैं।
मंत्रालय ने बताया कि सीबीएसई ने पहली बार वर्ष 2014 में इस प्रणाली को लागू किया था, लेकिन उस समय स्कैनिंग से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण इसे आगे जारी नहीं रखा जा सका। वर्ष 2026 में इसे नई तकनीकी व्यवस्थाओं और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के साथ फिर से लागू किया गया। इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग इस तरह की गई कि मूल कॉपियां सुरक्षित और बिना किसी बदलाव के बनी रहें। स्कैनिंग के बाद गुणवत्ता जांच की कई स्तरों पर व्यवस्था की गई। मूल्यांकन केंद्रों के लिए सुरक्षित नेटवर्क और स्थायी आईपी प्रणाली लागू की गई ताकि डेटा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
शिक्षकों को पहले से प्रशिक्षण भी दिया गया। मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत परीक्षा केंद्रों से कॉपियां आने के बाद सबसे पहले गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग हुई और गुणवत्ता संतोषजनक न मिलने पर दोबारा स्कैन किया गया। कॉपियों को अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया ताकि गोपनीयता बनी रहे। इसके बाद परीक्षकों ने ऑनलाइन माध्यम से मूल्यांकन किया और सहायक मुख्य परीक्षक तथा मुख्य परीक्षक स्तर पर दोबारा जांच की गई।
मंत्रालय के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के लिए जनवरी 2026 से प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया था। शुरुआत में पांच स्कूलों में परीक्षण किया गया, फिर शिक्षकों के लिए प्रदर्शन और प्रशिक्षण सत्र आयोजित हुए। 13 फरवरी को देशभर के शिक्षकों के लिए वेबिनार आयोजित किया गया, जिसे लाखों लोगों ने देखा। 15 फरवरी से शिक्षकों को पुराने वर्षों की उत्तर पुस्तिकाओं पर अभ्यास की सुविधा दी गई और 7 मार्च से वास्तविक मूल्यांकन कार्य शुरू हुआ।
सीबीएसई ने बताया कि इस वर्ष कुल 98 लाख 66 हजार 222 उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग की गई। शुरुआती चरण में कई तकनीकी दिक्कतें सामने आईं।
कुछ स्कूलों को सुरक्षित नेटवर्क अनुमति प्रणाली में परेशानी हुई, कई शिक्षकों को लॉगिन समस्या का सामना करना पड़ा और शुरुआती दिनों में सर्वर पर अधिक दबाव के कारण डाउनलोड संबंधी समस्याएं भी आईं। बाद में इन सभी समस्याओं को तकनीकी सहायता के जरिए दूर किया गया। कुछ मामलों में ऐसे छात्रों के कम अंक आने पर भी सवाल उठे, जिन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए थे।
इन शिकायतों के बाद सीबीएसई ने कहा है कि वह छात्रों की चिंताओं के प्रति संवेदनशील है और इसलिए उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने, सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की विस्तृत प्रक्रिया शुरू की गई है। नई व्यवस्था के तहत छात्र पहले संबंधित विषय की स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका प्राप्त करेंगे। इसके बाद वे स्वयं जांच सकेंगे कि मूल्यांकन सही हुआ है या नहीं तथा मार्किंग स्कीम के अनुसार अंक दिए गए हैं या नहीं। यदि छात्र को किसी प्रकार की त्रुटि दिखाई देती है तो वह अपनी टिप्पणियों के साथ बोर्ड को सूचित कर सकेगा। इसके बाद विषय विशेषज्ञों की समिति मामले की जांच करेगी और तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय लेकर छात्र को सूचित करेगी।

