मुंबई, 20 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने सीजेपी के विरोध प्रदर्शन पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देशभर में विभिन्न मुद्दों को लेकर जनता के बीच बढ़ता असंतोष अब व्यापक जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है और सरकार को इन मुद्दों पर संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है।
रईस शेख ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर जंतर-मंतर को एक तरह से जेल में तब्दील कर दिया गया है। यह विरोध प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक दल, चाहे वह समाजवादी पार्टी हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य संगठन, का नहीं है, बल्कि यह आम जनता के गुस्से और असंतोष की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा, विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार की कथित विफलताओं के कारण लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।
उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों ने देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरी निराशा में डाल दिया। इस घटनाक्रम से कई छात्रों ने अपनी जान तक गंवा दी। रईस शेख ने कहा कि शिक्षा, युवाओं और अन्य जनसरोकार से जुड़े कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सरकार प्रभावी समाधान देने में असफल रही है। यही वजह है कि दिल्ली के साथ-साथ देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। उन्होंने कहा कि जनता इन आंदोलनों के माध्यम से सरकार को यह संदेश देना चाहती है कि उसकी नीतियों को लेकर व्यापक असंतोष है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का जिक्र करते हुए रईस शेख ने कहा कि उनका अनशन समाप्त कराने के लिए अदालत के आदेश का सहारा लिया गया और उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इस घटनाक्रम से लोगों में नाराजगी और अधिक बढ़ी है तथा इससे आंदोलन को और बल मिला है।
संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने पर भी समाजवादी पार्टी विधायक ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और वह जनता के लिए है। यदि नागरिक अपनी बात रखने या संवाद की अपेक्षा लेकर आते हैं तो सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि संवाद की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो विरोध प्रदर्शन और संघर्ष आगे भी जारी रहेंगे। रईस शेख ने दावा किया कि यह आंदोलन अब केवल विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि जन आंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
रईस शेख ने आरोप लगाया कि सरकार अपने रवैये में बदलाव के संकेत नहीं दे रही है और न ही प्रदर्शनकारियों या विपक्ष के साथ सार्थक संवाद स्थापित करने की पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही समस्याओं के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम होता है और सरकार को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।

