उत्तराखंड, 22 जुलाई (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित डोडीताल झील के तट पर विराजमान ‘श्री गणेश मंदिर’ आस्था का एक अनूठा केंद्र है। मंदिर का इतिहास काफी पुराना बताया है, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
बुधवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए मंदिर की जमकर प्रशंसा की। साथ ही, सभी से मंदिर के एक बार दर्शन करने की भी अपील की।
उन्होंने मंदिर की भव्य वीडियो जारी करते हुए लिखा, “श्री गणेश मंदिर, डोडीताल (उत्तरकाशी) आस्था, शांति और प्राकृतिक सुंदरता का एक पवित्र स्थान है। यह मंदिर हरे-भरे जंगलों, पहाड़ों और शांत डोडीताल झील के पास स्थित है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक दिव्य और अद्भुत अनुभव मिलता है। अगर आप उत्तरकाशी जाएं, तो इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें।”
मंदिर की भव्यता का गुणगान दूर दूर तक सुनने को मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह भगवान गणेश की जन्मस्थली माना जाता है। झील के किनारे स्थित इस प्राचीन मंदिर में गणपति की पूजा मां अन्नपूर्णा के साथ की जाती है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता रानी ने इसी स्थान पर गणेश भगवान को जन्म दिया था। स्थानीय भाषा में भगवान गणेश को डोडीराजा कहा जाता है। हालांकि, यहां पर डोडीताल नाम की एक विशाल झील है, जो चोरों और फैले हरे-भरे घास के मैदानों के बीच स्थित है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
यह स्थान उत्तरकाशी के असी गंगा केलसू क्षेत्र में स्थित है। केलसू क्षेत्र असी गंगा नदी घाटी के सात गांवों को मिलाकर बना है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, डोडीताल क्षेत्र कभी मध्य कैलाश का हिस्सा माना जाता था और यह माता पार्वती और भगवान शिव का स्नान स्थल था। हालांकि कैलाश पर्वत यहां से बहुत दूर है, लेकिन लोगों की आस्था है कि एक समय माता पार्वती यहां आई थीं और इसी स्थान पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यह विश्व के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है, जहां भगवान गणेश अपनी माता (मां अन्नपूर्णा) के साथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हैं, जबकि शिव मंदिर मुख्य मंदिर के बाहर स्थित है।

