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सीएम शिवकुमार ने पीएम मोदी से विशेष वित्तीय पैकेज और सूखा राहत कार्यों में तेजी लाने का किया आग्रह

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बेंगलुरु, 5 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता, लंबित सिंचाई परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने और सूखा राहत कोष को तुरंत जारी करने की मांग की है। उन्होंने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में ये मांगें रखीं। यह पत्र प्रधानमंत्री के 31 अक्टूबर के उस पत्र के जवाब में था, जिसमें उन्होंने कर्नाटक को ‘कन्नड़ राज्योत्सव’ की बधाई दी थी और देश की प्रगति व विकास में राज्य के योगदान को सराहा था।

अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कन्नड़ राज्योत्सव पर कर्नाटक के लोगों को बधाई दी थी। इसके साथ ही राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ-साथ तकनीक, नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र-निर्माण में इसके योगदान का उल्लेख किया था। उन्होंने बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेसवे, बेंगलुरु मेट्रो का विस्तार, रेलवे के आधुनिकीकरण, केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 और तुमकुरु में एचएएल हेलीकॉप्टर फैक्ट्री जैसी कई केंद्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी जिक्र किया। इसके अलावा, पीएम मोदी ने जल संरक्षण, सूखा प्रबंधन, स्वच्छता और टिकाऊ शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में केंद्र और राज्य के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।

प्रधानमंत्री को जवाब देते हुए शिवकुमार ने ‘नम्मा मेट्रो’ की पिंक लाइन के उद्घाटन के लिए उनके प्रस्तावित कर्नाटक दौरे का स्वागत किया और बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए एक विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की। शहर में बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां की सड़कों, सार्वजनिक परिवहन और नागरिक बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव है। उन्होंने ट्रैफिक की समस्या को दूर करने के लिए रक्षा विभाग की जमीन को उचित कीमत पर हासिल करने में केंद्र से मदद भी मांगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए अधिक फंड, आवास लक्ष्य और वैकल्पिक वित्तपोषण (फंडिंग) प्राप्त किया जा सके।

शिवकुमार ने प्रधानमंत्री से कई लंबित सिंचाई परियोजना मेकेदातु, कलसा-बंदूरी, ऊपरी भद्रा, ऊपरी कृष्णा और येत्तिनाहोले के लिए मंजूरी और क्लीयरेंस की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दक्षिणी कर्नाटक की पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेकेदातु परियोजना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे अतिरिक्त पानी को स्टोर करने में मदद मिलेगी और साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि तमिलनाडु को उसका उचित हिस्सा मिले। उन्होंने ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (पीएमकेएसवाई) और ‘त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम’ (एआईबीपी) के तहत भेजे गए प्रस्तावों के लिए केंद्र से समर्थन मांगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘जल जीवन मिशन’ के तहत कर्नाटक ने 90.61 लाख घरों में नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। सितंबर 2026 तक, राज्य के 89.52 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक यह सुविधा पहुंच चुकी है। उन्होंने लंबित फंड को तुरंत जारी करने और ग्रामीण विकास तथा पेयजल परियोजनाओं के लिए अधिक आवंटन की मांग की, खासकर उन इलाकों के लिए जहां पानी की कमी है या पानी की गुणवत्ता खराब है।

शिवकुमार ने बताया कि एक वैज्ञानिक आकलन के बाद राज्य के 240 तालुकों में से 226 को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कर्नाटक में सामान्य 852 मिमी के मुकाबले 551 मिमी बारिश हुई, जो 35 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। 1956 के बाद से पिछले 70 वर्षों में यह दूसरी सबसे कम बारिश है। उन्होंने यह भी बताया कि 237 तालुकों में लगातार तीन या उससे अधिक हफ्तों तक सूखा रहा है और तय लक्ष्य के मुकाबले लगभग 11.97 लाख हेक्टेयर भूमि पर बुआई नहीं हो सकी। राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से प्रति किसान 2,500 रुपये जारी किए हैं और केंद्र से अंतरिम राहत की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है।

मुख्यमंत्री ने सूखे की स्थिति और गन्ना किसानों की मांगों पर चर्चा करने के लिए कर्नाटक के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात का अनुरोध फिर से दोहराया। उन्होंने सूखे के लिए सहायता राशि जल्द जारी करने और किसानों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने के लिए पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की। इन मांगों में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में संशोधन, ‘फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस’ (एफआरपी) के लिए आधार रिकवरी दर को वापस 9.5 प्रतिशत पर लाना और गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमतों में संशोधन शामिल है। उन्होंने कहा कि गन्ने की पेराई का सीजन पहले ही देरी से शुरू हो रहा है और किसान केंद्र से आश्वासन मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

शिवकुमार ने बेंगलुरु में एक एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए केंद्र से सहयोग भी मांगा। उन्होंने बताया कि यह भारत का और संभवतः दुनिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय होगा। इसके अलावा, उन्होंने ‘कल्याणा कर्नाटक’ क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा शिक्षा में सुधार के लिए रायचूर में एक एम्स स्थापित करने की राज्य की मांग को भी दोहराया। अपने पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि कर्नाटक कोई विशेष विशेषाधिकार नहीं मांग रहा है, बल्कि वह केंद्र सरकार से अपना उचित हिस्सा, निष्पक्ष व्यवहार और समर्थन चाहता है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग बहुत जरूरी है।