Tuesday, August 4, 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स के विजेताओं ने देश के लिए पदक जीतते रहने की प्रतिबद्धता दोहराई

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नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को ग्लासगो, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश के लिए पदक जीतने वाले एथलीटों और पैरा-एथलीटों से मुलाकात की। खेल मंत्री ने पदक जीतने वाले एथलीटों को सम्मानित किया।

खेल मंत्री ने इस अवसर पर कहा, “जिस खिलाड़ी ने कभी स्वर्ण पदक नहीं जीता, वह शायद रजत पदक से संतुष्ट हो जाए। लेकिन जिसने पहले ही स्वर्ण जीता हो, उसके लिए रजत से संतोष करना मुश्किल होता है। रजत जीतने वाले खिलाड़ियों को स्वर्ण जीतने की कोशिश करनी चाहिए और स्वर्ण जीतने वाले खिलाड़ियों को उसे बरकरार रखने की कोशिश करनी चाहिए। रजत और कांस्य पदक विजेताओं का लक्ष्य स्वर्ण पदक होना चाहिए। एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, जो लोग लक्ष्य तय करते हैं, वही सफलता पाते हैं।”

पदक जीतने वाले एथलीटों और पैराएथलीटों से आईएएनएस ने बातचीत की।

पुरुषों के 55 किग्रा बॉक्सिंग इवेंट में रजत पदक जीतने वाले बॉक्सर जदुमणि सिंह ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतकर मैं बहुत खुश हूं। पूरी प्रतियोगिता के दौरान अपने प्रदर्शन से मैं संतुष्ट हूं। मैंने अपने सभी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन किया और सेमीफाइनल 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से जीता। मैंने इस प्रतियोगिता से बहुत कुछ सीखा है, और एशियाई खेलों में और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए मैं उन सीखों का इस्तेमाल करूंगा।”

महिलाओं के 75 किग्रा बॉक्सिंग इवेंट में रजत पदक जीतने पर भारतीय बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने कहा, “मैं अपना पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक जीतकर बहुत खुश हूं। फ्लैग बियरर (ध्वजवाहक) बनना मेरे लिए सम्मान की बात थी। मैं इन कॉमनवेल्थ गेम्स को हमेशा याद रखूंगी। मुझे अपनी टीम की उपलब्धियों पर भी बहुत गर्व है।”

पुरुषों के 60 किग्रा बॉक्सिंग इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाले मुक्केबाज सचिन सिवाच ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। मुझे खुद पर भरोसा था कि मैं स्वर्ण पदक जीतूंगा। टीम के सभी खिलाड़ियों ने अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया और पदक जीतकर लौटे। आने वाले प्रतियोगिताओं में हम अपना श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पदक जीतने की कोशिश करेंगे।”

महिलाओं के 54 किग्रा बॉक्सिंग इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने पर प्रीति पवार ने कहा, “अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है। हमारी पूरी टीम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। सभी बहुत प्रेरित थे और उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। हमने बॉक्सिंग में भारत के लिए इतिहास रचा है। कॉमनवेल्थ गेम्स में इससे पहले कभी किसी देश ने बॉक्सिंग में सात स्वर्ण पदक नहीं जीते थे। हमने नया मुकाम हासिल किया है। यह बहुत गर्व का पल है और मैं बहुत खुश हूं।”

पुरुषों के 60 किग्रा जूडो इवेंट में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाले जूडोका हर्ष सिंह ने कहा, “यह पदक भारत के उन सभी लोगों का है जिन्होंने मेरा साथ दिया है। यह मेरा पहला अंतरराष्ट्रीय पदक है। मुझे गर्व है कि मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है।”

महिलाओं के 57 किग्रा जूडो इवेंट में रजत पदक जीतने वाली जूडोका यामिनी मौर्य ने कहा, “मुझे याद है कि पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मेरा चयन नहीं हुआ था। मेरा नाम शामिल नहीं किया गया था। इसी वजह से लिगामेंट में गंभीर चोट होने के बावजूद मैंने अपनी घुटने की सर्जरी टाल दी थी। मैंने ट्रायल्स और टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की उम्मीद में सर्जरी नहीं करवाई, लेकिन आखिर में मैं दोनों ही मौकों से चूक गई। सर्जरी से ठीक होने के बाद मैं पहली बार सिलेक्शन ट्रायल्स में पहले स्थान पर रही। पहले मौका न मिल पाने की निराशा मेरे मन में थी, और उसी जज्बे के साथ मैं इस प्रतियोगिता में उतरी। मैं स्वर्ण जीतने के लिए पूरी तरह तैयार थी और उसके बहुत करीब भी पहुंच गई थी, आखिरी पलों में एक पेनल्टी की वजह से हार गई।”

महिलाओं के शॉट पुट एफ57 इवेंट में 7.26 मीटर के अपने अब तक के सबसे अच्छे थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतने पर भारतीय पैरा-एथलीट शिल्पा कंचुगाराकोप्पलू शायला ने कहा, “मैं लगभग डेढ़ महीने में फिर से ट्रेनिंग शुरू कर दूंगी। मैं कड़ी मेहनत करती रहूंगी, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगी और मेडल जीतने की कोशिश करूंगी। मुझे इस पल पर बहुत गर्व है।”

पुरुषों की 100 मीटर टी47 इवेंट में रजत पदक जीतने वाले पैरा-एथलीट मोहम्मद बासिल ने कहा, “मैंने बहुत कुछ झेला है और हर मुश्किल हालात का सामना किया है। मैंने पिछले साल ही पैरा-स्पोर्ट्स में हिस्सा लेना शुरू किया था और यह मेरा पहला अंतरराष्ट्रीय कॉम्पिटिशन था, जिसमें मैंने अपना पहला पदक जीता। मैं इसे लेकर बहुत खुश हूं। मैं अपनी टाइमिंग को लेकर थोड़ा निराश हूं क्योंकि मौसम के हालात बहुत मुश्किल थे। मैं अगले कॉम्पिटिशन में और बेहतर प्रदर्शन करूंगा।”

पुरुषों की 100 मीटर टी47 इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने पर पैरा-एथलीट दिलीप महादु गावित ने कहा, “सबसे पहले, धन्यवाद। मेरा सफर 2016 में शुरू हुआ, जब मेरे कोच ने मुझे अपनी देखरेख में लिया और मैंने ट्रेनिंग शुरू की। पहले मैं आम एथलीटों के साथ इवेंट्स में हिस्सा लेता था, लेकिन बाद में मैंने पैरा-एथलेटिक्स अपना लिया। मैंने चीन के हांगझोऊ में हुए 2022 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। मैंने एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था। अब, मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीता है और मैं बहुत खुश हूं।”

शॉट पुट एथलीट शुभम जुयाल ने कहा, “2022 में मेरा एक्सीडेंट हुआ था। 2026 में, मैंने कॉमनवेल्थ में हिस्सा लिया। 1 अगस्त 2022 को मेरा एक अंग काटना पड़ा था और ठीक चार साल बाद, 1 अगस्त 2026 को मैंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के सीटेड शॉट पुट एफ57 इवेंट में रजत पदक जीता। मेरा मानना ​​है कि यह एक शानदार सफर रहा है। हम भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन करते रहेंगे और देश के लिए मेडल जीतते रहेंगे।”

महिलाओं के शॉट पुट एफ57 इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने पर भारतीय पैरा-एथलीट शर्मिला धनखड़ ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर मैं बहुत खुश हूं। मुझे बहुत ज्यादा सपोर्ट मिला है। एथलीट्स को सपोर्ट करने के लिए एक पूरी आधिकारिक टीम है। हमारे कोच और पीसीआई के सभी अधिकारी भी हैं।”

पुरुषों के शॉट पुट एफ57 इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने वाले पैरा-एथलीट सोमन राणा ने कहा, “मुझे पूरे भारत के साथ-साथ पीएसआई, पीसीआई, अपने कोच और हमसे जुड़े सभी लोगों से इतना समर्थन पाकर बहुत खुशी हो रही है। मैंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता है और मैं बेहद खुश हूं।”