Friday, July 10, 2026
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हुसैन दलवई ने गरीब नगर बस्ती में ध्वस्तीकरण कार्रवाई को गलत ठहराया, कहा- मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश

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मुंबई, 19 मई (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र के बांद्रा में गरीब नगर बस्ती के ध्वस्तीकरण के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बांद्रा में गरीब नगर बस्ती को ध्वस्त करने का फैसला लिया गया। इसके नाम को ही देख लीजिए। यहां पर गरीब लोग रहते हैं। इसी को देखते हुए इसका नाम गरीब बस्ती रखा गया था

उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह अफसोस की बात है कि इसे ध्वस्त करने का फैसला किया गया। लेकिन, मेरा एक सवाल है कि क्या इसका अब तक सर्वे हुआ? क्या कोर्ट की तरफ से इस संबंध में किसी भी प्रकार का आदेश जारी किया गया? कुल मिलाकर, बात यहीं पर खत्म हो जाती है कि न ही अब तक इस पूरी बस्ती का सर्वे हुआ है और न ही कोर्ट की तरफ से इस संबंध में किसी भी प्रकार का आदेश आया है, तो आप भला इसे ध्वस्त करने का फैसला कैसे कर सकते हैं। वैसे भी यह पूरा मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है, तो ऐसी स्थिति में इस पर किसी भी प्रकार का फैसला करना उचित नहीं है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह सबकुछ गरीब मुसलमानों को परेशान करने की साजिश है। यह सरकार हर मुद्दे में सिर्फ हिंदू मुस्लिम करती है। आज की तारीख में पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी होने की वजह से महंगाई अपने चरम पर पहुंच चुकी है। इस वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, यह अफसोस की बात है कि सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके विपरीत यह सरकार आम लोगों का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने के लिए हिंदू-मुस्लिम जैसी स्थिति पैदा करनी कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह सरकार अमीरों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रही है। मैं आपको बता सकता हूं कि वर्ली में कई अमीर लोगों ने नियमों को ताक पर रखते हुए घर बनाए हैं। उन्होंने कहा कि किरीट सोमैया से कहना चाहूंगा कि आप यह पाप क्यों कर रहे हो? आखिर आप ये जो पाप कर रहे हो, इसे आप कहां लेकर जाओगे? गरीबों को तकलीफ देना बहुत बड़ा पाप और किसी का घर तोड़ना बहुत बड़ा पाप है। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग मजदूर हैं, जो 500 रुपए की मजदूरी पर काम करते हैं।

उन्होंने सीएम योगी के बयान पर कहा कि मुझे सड़क पर नमाज पढ़ना पसंद नहीं है, नमाज मस्जिद में पढ़ी जा सकती है। लिहाजा, इस विषय को ज्यादा तूल देना उचित नहीं है। लेकिन, मेरा यह कहना है कि हमारे यहां पर ज्यादातर त्योहार सड़क पर ही मनाए जाते हैं। गणपति बाबा का भी त्योहार हमारे यहां पर सड़क पर ही मनाया जाता है। सुबह-सुबह मंदिरों में भी घंटी बजाई जाती है और मस्जिदों में भी अजान होती है। ऐसी स्थिति में यही कहना चाहूंगा कि वो अब किसी भी मामले को हिंदू-मुस्लिम की दृष्टि से नहीं देखें।

उन्होंने आगे कहा कि अगर सरकार की ओर से सभी को समुचित शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा मिलेगी, तो मुझे पूरा विश्वास है कि जनसंख्या नियंत्रित होगी। एक बार जरा उत्तर प्रदेश और बिहार की स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। वहां पर जो जनसंख्या में बढ़ोतरी हो रही है, वो क्या मुस्लिमों की वजह से हो रही है। यह पूरा विषय शिक्षा से जुड़ा हुआ है। अगर आप शिक्षा पर जोर देंगे, तो जाहिर सी बात है कि लोग जागरूक होंगे और जनसंख्या काबू में आ जाएगी। आप दक्षिण भारत की स्थिति देख लीजिए, क्योंकि वहां पर लोग शिक्षित हैं और लोग जागरूक हैं। इस देश में जिंदा लोग कैसे रहेंगे, इस पर किसी भी प्रकार का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने एनकाउंटर के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एनकाउंटर के मामले बढ़ रहे हैं, उससे यह साफ जाहिर हो रहा है कि कानून व्यवस्था नहीं है।