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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के पास कोई काम नहीं, जनता के बीच जाएं : श्याम रजक

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पटना, 4 नवंबर (आईएएनएस)। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती दिए जाने पर निशाना साधा। इसके अलावा उन्होंने असम सरकार के बहुविवाह से जुड़े फैसले और मधुबनी में एक सहायक उपनिरीक्षक (एसआई) द्वारा ग्रामीणों पर कथित रूप से गोली चलाने की घटना पर भी अपनी बात रखी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को खुली बहस की चुनौती दिए जाने पर श्याम रजक ने कहा कि राहुल गांधी के पास कोई काम नहीं है। उन्हें जनता के बीच जाना चाहिए और उनके लिए काम करना चाहिए। अगर राहुल गांधी बहस करना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का एक छोटा-सा कार्यकर्ता भी उनसे बराबरी के स्तर पर और बेहतर तरीके से बहस करने के लिए तैयार है।

श्याम रजक ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को देश के निर्माण और विकास में अपनी भागीदारी निभानी है। ऐसे में राहुल गांधी को राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं पर काम करना चाहिए।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा लगातार 12 महीनों तक शून्य ऑपरेशनल कैजुअल्टी का रिकॉर्ड बनाए जाने पर श्याम रजक ने खुशी जाहिर की। उन्होंने सीआरपीएफ को उसके 47वें स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। सीआरपीएफ ने नई तकनीक और आधुनिक रणनीतियों का इस्तेमाल करते हुए जिस तरह अपने अभियानों की योजना बनाई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया, उसके परिणामस्वरूप जवानों को किसी तरह की क्षति नहीं हुई।

श्याम रजक ने कहा कि देश और समाज की सुरक्षा में सीआरपीएफ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। जवानों का बिना किसी नुकसान के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना और देश की सुरक्षा में लगातार योगदान देना सराहनीय है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सीआरपीएफ के सभी जवानों और अधिकारियों को बधाई दी।

मधुबनी में एक एएसआई द्वारा ग्रामीणों पर गोली चलाए जाने की घटना पर श्याम रजक ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के कारण जनता का प्रशासनिक व्यवस्था से विश्वास उठता जा रहा है। व्यवस्था में बैठे कुछ लोगों के आचरण के कारण आम जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है। सरकार को ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझ सकें और जनता के साथ उचित व्यवहार करें।