तेल अवीव, 26 अप्रैल (आईएएनएस)। इजरायल सरकार ने रविवार को उस प्रस्ताव को पारित कर दिया जो क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति से जुड़ा है। विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसकी खुशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए जाहिर की। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए काफी अहम बताया।
उन्होंने कहा, “सरकार ने क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में इजरायल के सामरिक हितों को पूरा करने के मेरे प्रस्ताव को पूर्ण बहुमत से मंजूरी दे दी है। क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई हमारी अर्थव्यवस्थाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा और अलग-अलग उद्योगों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी है।”
उन्होंने फरवरी में वाशिंगटन में हुए क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल सम्मेलन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में मुझे इजरायल का प्रतिनिधित्व करने का सम्मान मिला था। इजरायल इस वैश्विक चुनौती से निपटने में अमेरिका के साथ खड़ा है।
इजरायल ब्रोमीन, पोटाश, मैग्नीशियम और फॉस्फेट रॉक का उत्पादन करता है। सरकारी वेबसाइट के अनुसार ये अधिकतर डेड सी और नेगेव की खदानों से आते हैं। इजरायल खनिजों का बड़ा उत्पादक भले नहीं है लेकिन तकनीकी रूप से बहुत संपन्न है। ये खनन, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और सामग्री विज्ञान में उन्नत तकनीक प्रदान करने वाला एक प्रमुख हब है।
बता दें कि 4 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में अमेरिका समेत 50 देशों का एक सम्मेलन हुआ था। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए थे। इस दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सहयोगी और साझेदार देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक प्राथमिक व्यापार क्षेत्र (प्रेफरेंशियल ट्रेड जोन) का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि यह जोन बाहरी व्यवधानों से सुरक्षित रहेगा और उत्पादन के हर चरण पर तय संदर्भ कीमतों पर आधारित होगा। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि सहयोगी और साझेदार देश मिलकर एक ट्रेडिंग ब्लॉक बनाएं।”
उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य कीमतों को स्थिर करना, निजी निवेश को प्रोत्साहित करना और दीर्घकालिक योजना को संभव बनाना है।
इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित, विविध और मजबूत बनाना था। यह पहल विशेष रूप से चीन के प्रभुत्व वाली आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता को कम करने के लिए आयोजित की गई थी। सम्मेलन के दौरान ‘फोर्ज’ (फ्रेमवर्क फॉर ऑपरेशनलाइजिंग रीजिलिएंट ग्लोबल इकोसिस्टम्स) नामक एक नई पहल लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ाना है।
विदेश मंत्री ने ग्लोबल सप्लाई चेन में अत्यधिक एकाग्रता से पैदा होने वाले जोखिमों पर चिंता जताई थी और इसके लिए संरचित अंतरराष्ट्रीय सहयोग का समर्थन किया था।

