Monday, August 10, 2026
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दक्षिण कोरिया के स्थानीय चुनावों में वोटर आंकड़ों के अंतर ने उठाए सवाल, जांच जारी

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सोल, 10 अगस्त (आईएएनएस)। दक्षिण कोरिया में जून 2026 को स्थानीय चुनाव हुए थे। चुनावों के बाद मतदान के आंकड़ों में पहले मतपत्र को लेकर बवाल मचा था। अब एक और बड़ी विसंगति सामने आई है, जिसने देश की चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (एनईसी) के आंकड़ों के मुताबिक, मतदान खत्म होने के समय दर्ज मतदाताओं की संख्या और बाद में जारी अंतिम आंकड़ों में कई मतदान केंद्रों पर उल्लेखनीय अंतर पाया गया है।

योनहाप न्यूज एजेंसी की सोमवार को एक रिपोर्ट छापी। एजेंसी ने बताया कि 3 जून को हुए स्थानीय चुनावों में 3,558 मतदान क्षेत्रों में मतदान हुआ था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें से 1,971 क्षेत्रों में मतदान समाप्त होने के समय दर्ज संख्या और अंतिम आंकड़े एक जैसे नहीं थे। करीब 29 मतदान क्षेत्रों में यह अंतर 100 या उससे अधिक मतदाताओं का था।

इनमें कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें अंतर काफी बड़ा है। सोल के दक्षिण में स्थित आनसॉन्ग के एक मतदान केंद्र पर शाम 6 बजे मतदान समाप्त होने के समय 2,105 मतदाता दर्ज किए गए थे, लेकिन बाद में अंतिम संख्या 1,494 बताई गई। दूसरी ओर, बुसान के एक मतदान केंद्र पर शाम 6 बजे 7,137 मतदाताओं का आंकड़ा दर्ज हुआ, जबकि अंतिम आंकड़ा बढ़कर 7,922 हो गया।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इन आंकड़ों में इतना अंतर क्यों आया। मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि दक्षिण कोरिया में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं की पहले से जांच चल रही है।

एक संयुक्त अभियोजन-पुलिस जांच दल चुनाव के दिन मतपत्रों की कमी से जुड़े मामले की भी पड़ताल कर रहा है। जांच के दौरान ऐसे आरोप सामने आए हैं कि निर्वाचन आयोग के कुछ अधिकारियों ने मतदान प्रतिशत से संबंधित प्रति घंटे जारी होने वाले आंकड़ों में बदलाव किया था।

हालांकि, राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों को लेकर सफाई दी है। आयोग का कहना है कि मतदान के दौरान हर घंटे जारी किए जाने वाले आंकड़े प्रारंभिक होते हैं। मतदान समाप्त होने के बाद सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं के चलते अंतिम आंकड़ों में अंतर आ सकता है।

ऐसे में फिलहाल केवल आंकड़ों में अंतर को चुनाव में गड़बड़ी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि इन बदलावों के पीछे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या किसी स्तर पर जानबूझकर हस्तक्षेप किया गया। जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।