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दलेर मेहंदी विवाद पर सोना मोहापात्रा का गुस्सा फूटा, बोलीं-सम्मान एकतरफा नहीं होता

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मुंबई, 21 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तराखंड में दलेर मेहंदी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे विवाद के बीच गायिका सोना मोहापात्रा ने परफॉर्मिंग आर्ट्स में प्रोफेशनल जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि दर्शक भी सम्मान के हकदार हैं।

सोना मोहापात्रा ने इंस्टाग्राम पर दलेर मेहंदी के लिए एक लंबा पोस्ट शेयर किया, जिसमें गायिका ने बताया कि उन्होंने फरवरी में दिल्ली में हुए एक सूफी फेस्टिवल की पहली शाम को हेडलाइन किया था जबकि दलेर मेहंदी को अगले दिन, 1 मार्च को समापन प्रस्तुति के लिए बुलाया गया था। उन्होंने लिखा, “मैं उत्तराखंड में दलेर मेहंदी जी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे विवाद को देख रही हूं और मुझे अपनी एक निजी घटना साझा करने की जरूरत महसूस हो रही है। किसी दिग्गज का अनादर करने के लिए नहीं बल्कि इसलिए कि हम सभी के लिए परफॉर्मिंग आर्ट्स में एक बड़ा और असहज सवाल खड़ा होता है। 28 फरवरी को मैं दिल्ली के सुंदर नर्सरी हेरिटेज फेस्टिवल की शाम को शामिल हुई थी और दिलेर जी अगले दिन 1 मार्च को समापन प्रस्तुति के लिए आए थे।”

गायिका ने बताया कि वह और उनकी पूरी टीम रातभर दलेर मेहंदी के परफॉर्मेंस के लिए वहीं रुकी रही। उन्होंने कहा, “कलाकार आमतौर पर अपने शो के बाद नहीं रुकते हैं लेकिन ऑर्गेनाइजिंग टीम ने बड़ी उदारता से हमारी एक रात और रुकने की रिक्वेस्ट मान ली। हम सच में एक दिग्गज को परफॉर्म करते देखने के लिए उत्साहित थे, जिसके बारे में हमें बताया गया था कि वह एक बिल्कुल अलग सूफी स्टाइल में होगा।”

सोना ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा, “हम लोग जैसा सोचकर रुके थे, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। स्टेज पर दलेर जी काफी उलझे हुए लग रहे थे, उन्हें एक सुर पकड़ने में भी मुश्किल हो रही थी और वह एक ही धुन को बार-बार दोहरा रहे थे। पूरा प्रोडक्शन निराश था। हमने देखा कि कैसे दर्शक धीरे-धीरे वहां से जाने लगे, वो लोग जिन्होंने अच्छे पैसे देकर टिकट खरीदा था और बड़ी उम्मीदों के साथ आए थे।”

उन्होंने कहा, “सबसे ज्यादा मुझे आयोजकों के लिए बुरा लगा था, जिन्होंने अपने संसाधन, साख और काफी मेहनत एक सम्मानित कलाकार को पेश करने में लगाई थी और फिर भी हममें से किसी ने भी कुछ नहीं कहा। मुझे दलेर जी की निजी परिस्थितियों या सेहत के बारे में कोई जानकारी नहीं है और हमने जो देखा उस पर मैं कोई अंदाजा नहीं लगाना चाहूंगी। मेरा यह भी मानना है कि किसी कलाकार को सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना कोई समाधान नहीं है।”

अभिनेत्री ने दर्शकों के इमोशन और मैनेजमेंट पर सवाल उठाते हुए लिखा, “उत्तराखंड में हुए विवाद को देखकर मुझे हैरानी हो रही है कि बातचीत का ज्यादातर हिस्सा कलाकार के अपमान पर हो रहा है। दर्शकों की उम्मीदों और मोटी प्रोफेशनल फीस लेने वालों की जिम्मेदारी पर बहुत कम बात हो रही है। दो बातें एक साथ सच हो सकती हैं।”

उन्होंने दलेर मेहंदी को लेकर लिखा, “एक दिग्गज कलाकार सम्मान, सहानुभूति और जीवनभर के योगदान के लिए आभार का हकदार है और दर्शक एक ईमानदार परफॉर्मेंस के हकदार हैं। अगर कोई अस्वस्थ है, तो उसके साथ सहानुभूति होनी चाहिए और स्थिति को संभालने का एक जिम्मेदार तरीका होना चाहिए। जो चीज स्वीकार्य नहीं हो सकती, वह यह है कि बार-बार दर्शक और आयोजक ही इसका खामियाजा भुगतें जबकि कलाकार के आसपास के सभी लोग आंखें मूंद लें।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे नहीं पता कि उत्तराखंड में मंत्री ने स्थिति को सही तरीके से संभाला या नहीं। यह एक अलग सवाल है लेकिन क्या उनकी आपत्ति जताने के तरीके से शिकायत का मूल मुद्दा ही खत्म हो जाता है?”

सोना ने सवाल उठाते हुए कहा कि “सम्मान कोई एकतरफा हक नहीं है”। उन्होंने लिखा, “मैं यह सवाल एक साथी परफॉर्मिंग आर्टिस्ट के तौर पर पूछ रही हूं, यह जानते हुए कि इसके लिए मेरी आलोचना भी हो सकती है। सम्मान एकतरफा हक नहीं है बल्कि यह आपसी लेनदेन का रिश्ता है। उम्र, विरासत और कद सम्मान के योग्य हैं लेकिन वे हममें से किसी को भी प्रोफेशनल जवाबदेही से मुक्त नहीं करते।”

उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए लिखा, “हममें से जो उस शाम चुप रहे, जिसमें मैं भी शामिल हूं, उन्हें यह पूछना होगा कि क्या हमारी अच्छी नीयत वाली खामोशी ने किसी की भी मदद की। मैं यह दुख के साथ साझा कर रही हूं, दुर्भावना से नहीं और दलेर मेहंदी जी की असाधारण विरासत के लिए सच्चे सम्मान के साथ लेकिन क्या हम अपने दर्शकों के प्रति भी कुछ सम्मान नहीं रखते?”