Wednesday, August 19, 2026
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दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: संजय निरुपम का आप पर हमला, कहा- ईमानदारी का दावा बेनकाब

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मुंबई, 19 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कथित दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों की गिरफ्तारी, तमिलनाडु सरकार के तीसरे बच्चे के जन्म पर 365 दिन की मातृत्व छुट्टी देने के फैसले और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया, वहीं राहुल गांधी पर समाज के अलग-अलग वर्गों को भड़काकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों की गिरफ्तारी पर संजय निरुपम ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता कभी देश की जनता को ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का पाठ पढ़ाते थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पार्टी के कई प्रमुख नेता भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों में जेल जा चुके हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया खुद को कट्टर ईमानदार बताते रहे, लेकिन दोनों को जेल जाना पड़ा। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के खिलाफ दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े मामले में कार्रवाई हुई है।

उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से आम आदमी पार्टी के उस राजनीतिक दावे पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसके आधार पर उसने खुद को पारंपरिक राजनीति और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक विकल्प के तौर पर पेश किया था। पार्टी का पूरा राजनीतिक ढांचा और उसके द्वारा किए गए ईमानदारी के दावे अब जनता के सामने बेनकाब हो चुके हैं। देश के मतदाताओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े दावे करने वाले राजनीतिक दलों और नेताओं को उनकी जवाबदेही के आधार पर परखा जाना चाहिए। स्थापित राजनीतिक नेतृत्व को बदनाम करके खुद को ईमानदार और अलग विकल्प के तौर पर पेश करने वाली राजनीति से जनता को सावधान रहने की जरूरत है।

तमिलनाडु सरकार के तीसरे बच्चे के जन्म पर महिला को 365 दिन की मैटरनिटी लीव देने के फैसले पर भी निरुपम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत में जनसंख्या को लेकर परिस्थितियां पिछले कुछ दशकों में तेजी से बदली हैं। एक समय भारत के सामने तेजी से बढ़ती आबादी की समस्या थी। उस दौर में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कई योजनाएं और अभियान चलाए गए। लेकिन, अब देश के सामने एक नई चुनौती उभर रही है। जन्मदर में कमी और बुजुर्ग आबादी के बढ़ते अनुपात के कारण आने वाले वर्षों में भारत को एजिंग पॉपुलेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में कम प्रजनन दर और बढ़ती उम्र की आबादी को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू द्वारा दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों को प्रोत्साहन देने की दिशा में की गई घोषणाओं का भी जिक्र किया। तमिलनाडु सरकार के इस फैसले को भी इसी बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। आने वाले समय में यह देश के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।

उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तर भारत के राज्यों को भी प्रजनन दर से जुड़े बदलते रुझानों पर ध्यान देना चाहिए और ऐसी नीतियों पर विचार करना चाहिए, जिनसे देश भविष्य में जापान और चीन जैसे देशों की तरह तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की समस्या से न जूझे।

राहुल गांधी के हालिया बयानों पर संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को समाज के अलग-अलग वर्गों को मुद्दों के आधार पर लामबंद करने और भड़काने का एक राजनीतिक फार्मूला मिल गया है। पहले युवाओं और छात्रों को लेकर राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की और अब वे ओबीसी समाज को लेकर बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि देश का ओबीसी समाज केंद्र सरकार के खिलाफ क्यों जाएगा, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ओबीसी समाज से आते हैं और केंद्र सरकार की ओर से ओबीसी समुदाय के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं।

उन्होंने एनडीए शासित राज्यों में ओबीसी समाज से आने वाले मुख्यमंत्रियों का भी उल्लेख किया और बिहार व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण दिया। निरुपम ने कहा कि ऐसे राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी द्वारा ओबीसी समाज की भावनाओं को भड़काने वाले बयान देना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का मौजूदा राजनीतिक एजेंडा और उसकी राजनीतिक रणनीति जनता द्वारा खारिज की जा चुकी है। अब समाज के अलग-अलग वर्गों को अलग-अलग मुद्दों पर उकसाकर राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

संजय निरुपम ने कहा कि आने वाले समय में देश की जनता ऐसी राजनीति को समझेगी और यह पहचान करेगी कि कौन से नेता और राजनीतिक दल वास्तव में जनता के मुद्दों पर काम कर रहे हैं और कौन केवल राजनीतिक लाभ के लिए सामाजिक वर्गों के बीच असंतोष पैदा करने की कोशिश कर रहा है।