नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। दिल्ली में एक बार फिर यमुना किनारे बसे इलाकों को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। निगमबोध घाट के पास स्थित यमुना बाजार कॉलोनी में रहने वालों को 15 दिन में जगह खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। इस आदेश के बाद इलाके में रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई है।
यह कॉलोनी यमुना नदी के किनारे बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में स्थित है, जिसे प्रशासन ने ओ-जोन, यानी बेहद संवेदनशील बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। सरकार का कहना है कि यह इलाका हर साल बारिश और यमुना में पानी बढ़ने के दौरान बुरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे लोगों की जान, मवेशी और संपत्ति को गंभीर खतरा पैदा होता है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की जमीन पर बने इस लगभग 310 मकानों वाले रिहायशी क्लस्टर को लेकर यह नोटिस दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की ओर से जारी किया गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि लोगों को 15 दिनों के भीतर यह इलाका खाली करना होगा।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि यह कदम आपदा प्रबंधन कानून के तहत लिया गया है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके। प्रशासन का कहना है कि हर साल बाढ़ आने पर राहत और बचाव कार्यों में भारी संसाधन खर्च होते हैं और आम जनता को भी बड़ी परेशानी झेलनी पड़ती है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर लोग समय सीमा के भीतर जगह खाली नहीं करते हैं, तो प्रशासन बिना किसी और नोटिस के अवैध निर्माणों को हटाने और लोगों को हटाने की कार्रवाई करेगा।
पिछले साल जब दिल्ली में बाढ़ आई थी, तब यह इलाका पूरी तरह पानी में डूब गया था। उस समय लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था। कई परिवारों को राहत शिविरों में रहना पड़ा था और काफी नुकसान भी हुआ था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौके पर पहुंची थीं और प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने प्रशासन को राहत कार्य तेज करने के निर्देश भी दिए थे।
अब प्रशासन ने इस इलाके को गंभीर खतरे वाला क्षेत्र मानते हुए स्थायी कदम उठाने की दिशा में कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, क्योंकि यमुना का जलस्तर हर साल मानसून में तेजी से बढ़ जाता है।

