Friday, June 12, 2026
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पंजाब में धान सीजन से पहले खाद संकट की आशंका, केवल सिंह ढिल्लों की केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

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नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और यूरिया की पर्याप्त एवं समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

पत्र में केवल सिंह ढिल्लों ने 6 जून को जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान पंजाब के किसानों के लिए डीएपी और यूरिया की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा हुई थी। अब धान की बुआई का मौसम शुरू हो चुका है, इसलिए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा में पंजाब की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हर साल जून और जुलाई में धान की बुआई के दौरान राज्य के कई जिलों और खुदरा केंद्रों पर डीएपी और यूरिया की कमी देखने को मिलती है। इसके कारण किसानों को सहकारी समितियों और खाद बिक्री केंद्रों पर घंटों, कभी-कभी कई दिनों तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। इससे बुआई में देरी होती है, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन, पानी के बेहतर उपयोग और सरकारी खरीद व्यवस्था पर पड़ता है।

केवल सिंह ढिल्लों ने यह भी कहा कि खाद की कमी होने पर जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ जाती है। मजबूरी में किसानों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ती है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है।

उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें खरीफ 2026 के लिए पंजाब को अतिरिक्त डीएपी आवंटन तुरंत जारी करना और राज्य में कम से कम 2 से 3 लाख मीट्रिक टन का बफर स्टॉक बनाए रखना शामिल है। इसके अलावा यूरिया की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मासिक आपूर्ति कार्यक्रम तैयार कर पंजाब सरकार और संबंधित एजेंसियों के साथ साझा करने की मांग की गई है।

पत्र में उर्वरक मंत्रालय, इफको, एनएफएल, कृभको और पंजाब सरकार के बीच रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं समन्वय स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया है। साथ ही खाद की जमाखोरी, अवैध भंडारण और दूसरे राज्यों में डायवर्जन रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि पंजाब के किसान देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। ऐसे में बुआई के महत्वपूर्ण समय पर खाद की उपलब्धता में कोई भी बाधा न केवल लाखों किसान परिवारों को प्रभावित करेगी, बल्कि राष्ट्रीय कृषि उत्पादन और खाद्यान्न खरीद व्यवस्था पर भी व्यापक असर डाल सकती है।