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धनतेरस पर क्यों खरीदते हैं झाड़ू? जानिए लक्ष्मी जी से जुड़ा शुभ संयोग

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नई दिल्ली, 4 नवंबर(आईएएनएस)। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला धनतेरस का त्योहार धन, समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, वाहन तथा भूमि-भवन जैसी वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व है। हालांकि, इन सभी के बीच एक ऐसी वस्तु है, जिसकी खरीद को बहुत अधिक शुभ माना जाता है और वह है झाड़ू।

सुनने में भले ही यह एक मामूली चीज लगे, लेकिन हिंदू धर्म में झाड़ू को बहुत खास माना गया है। आखिर इस साधारण-सी झाड़ू का धनतेरस के पावन पर्व पर क्या महत्व है और इसे खरीदना क्यों आवश्यक माना गया है? आइए, इसके धार्मिक और आध्यात्मिक पक्षों को विस्तार से समझें।

धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि साफ और स्वच्छ घर में ही माता लक्ष्मी का स्थायी वास होता है। झाड़ू घर की गंदगी को बाहर करती है, इसलिए इसे देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। झाड़ू घर से कचरे के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता (गरीबी) को बाहर कर देती है। धनतेरस पर नई झाड़ू लाने से घर में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कहा जाता है कि जिस घर में मां लक्ष्मी का वास होता है, वहां दुख-दरिद्रता कभी नहीं आती है। ऐसे में जो लोग आर्थिक चुनौतियों या कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें धनतेरस के मौके पर झाड़ू खरीदकर पूजा-अर्चना जरूर करनी चाहिए। मान्यता है कि इस दिन नई झाड़ू खरीदकर घर में लाने से आर्थिक संकट दूर होने के साथ सुख-समृद्धि का आगमन होता है। कई घरों में धनतेरस के मौके पर नई झाड़ू में सफेद धागा भी बांधा जाता है।

ऐसी भी मान्यता है कि झाड़ू को हमेशा घर के ऐसे कोने में छिपाकर रखना चाहिए, जहां बाहरी लोगों की नजर आसानी से न पड़े। ज्योतिष शास्त्र और वास्तु शास्त्र के अनुसार, झाड़ू को धन की देवी मां लक्ष्मी का रूप माना गया है। इसे खुले में या मुख्य दरवाजे के सामने रखने से घर आने-जाने वालों की नजर इस पर पड़ती है, जिसे ज्योतिष में मां लक्ष्मी का अनादर माना जाता है।

वहीं, इसे नजरों से दूर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और पैसों की रुकावट नहीं आती है। वास्तु के अनुसार, झाड़ू रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) की दिशा को सबसे शुभ माना गया है। इसे कभी भी ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या मंदिर/रसोई के पास नहीं रखना चाहिए। कई परंपराओं के अनुसार, धनतेरस पर झाड़ू हमेशा सम संख्या (आमतौर पर एक या जोड़ी में) में खरीदना शुभ माना जाता है।