नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। पिछले साल वनडे विश्व कप जीतने के कारण महिला टी20 विश्व कप 2026 में भारतीय टीम से काफी उम्मीदें थीं। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम को खिताब का प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था। हालांकि, रविवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के साथ ही टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाजी:भारतीय टीम को स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की जोड़ी ने कई मुकाबलों में ताबड़तोड़ शुरुआत दी, लेकिन मध्यक्रम की धीमी बल्लेबाजी टीम को काफी महंगी पड़ी। खासतौर पर जेमिमा रोड्रिग्स जरूरत से ज्यादा धीमी बैटिंग करती नजर आईं, जिसका खामियाजा भारतीय टीम को भुगतना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी जेमिमा ने 34 रन बनाने के लिए 28 गेंदें खेलीं। बीच के ओवरों में अधिक डॉट गेंदें खेलने का भी भारतीय टीम को नुकसान उठाना पड़ा। खुद कप्तान हरमनप्रीत का पूरे टूर्नामेंट में स्ट्राइक रेट 131 का ही रहा।
खराब फील्डिंग और कैच छोड़ना पड़ा भारी: भारतीय टीम की टूर्नामेंट में फील्डिंग बेहद साधारण रही। खिलाड़ियों ने मुकाबले के कई अहम मौके पर कैच छोड़े। इसके साथ ही भारतीय फील्डर्स ने खराब फील्डिंग के कारण कई अतिरिक्त रन भी दिए, जो टीम को अंत में भारी पड़े। खराब फील्डिंग की वजह से भारतीय गेंदबाज विपक्षी टीम की बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में नाकाम रहीं।
तेज गेंदबाजी दिखी बेअसर: इंग्लैंड जैसी बेहतरीन परिस्थितियों में भी भारतीय तेज गेंदबाज विकेटों के लिए जूझती हुई नजर आईं। रेणुका सिंह ने कुल 2 विकेट लिए और उनका इकोनॉमी 8.85 का रहा। वहीं, क्रांति गौड़ और नंदिनी शर्मा जैसी गेंदबाज भी बेअसर दिखाई दीं। श्री चरणी ने जरूर टूर्नामेंट में 14 विकेट चटकाए, लेकिन उन्हें तेज गेंदबाजों का साथ नहीं मिल सका।
जरूरत से ज्यादा स्पिनर्स पर निर्भरता:भारतीय टीम इस विश्व कप में जरूरत से ज्यादा स्पिन गेंदबाजों पर निर्भर नजर आई। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भी 19 ओवरों में से 14 ओवर स्पिन गेंदबाजों ने डाले। तेज गेंदबाजों के लिए अनुकूल परिस्थितियों में स्पिनर्स पर निर्भरता हरमनप्रीत एंड कंपनी को भारी पड़ी। टूर्नामेंट में भारतीय टीम द्वारा लिए गए कुल विकेटों में से 87 प्रतिशत विकेट सिर्फ स्पिनर्स ने चटकाए।
कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में बेरंग दिखीं हरमनप्रीत: भारतीय टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर के लिए यह टूर्नामेंट बल्ले और कप्तानी दोनों में कुछ खास नहीं रहा। ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ हरमनप्रीत की कप्तानी बेहद साधारण नजर आई। इसके साथ ही 5 मुकाबलों में वह बल्ले से सिर्फ 141 रन ही बना सकीं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 56 रनों की पारी को हटा दिया जाए, तो वह बाकी 4 पारियों में महज 85 रन ही बना पाईं।

