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डिजिटल वॉरफेयर के दौर में सतर्क रहें सैनिक परिवार, कर्नल अजय रैना की चेतावनी

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जम्मू, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। डिजिटल वॉरफेयर के दौर में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कैसे सैनिकों के परिवारों को दुश्मन का टारगेट बना सकती है, फिल्म इंडस्ट्री में 100-200 करोड़ की फंडिंग के पीछे का सच क्या है और देशद्रोह जैसे मामलों पर कानून होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं होती, इन सभी मुद्दों पर सेवानिवृत्त कर्नल अजय रैना ने अपनी राय रखी है।

सेवानिवृत्त कर्नल अजय रैना ने कहा, “चाहे सेना हो, वायु सेना हो या नौसेना, बड़े स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल हैं कि क्या करना है, क्या नहीं करना है और इसलिए सोशल मीडिया पर काफी प्रतिबंध हैं, लेकिन सब होने के बावजूद कई बार आप देखते हैं कि सोशल मीडिया पर किसी महिला ने अपने पति के साथ यूनिफॉर्म में फोटो पोस्ट कर दी और लिख दिया कि हम फौजी एकोमोडेशन में रहते हैं तो दुश्मन तो देख रहा है और वह एक बार आपको आइडेंटिफाई कर लेता है कि यह टारगेट है, फिर आपको ट्रैप करता है।”

उन्होंने कहा, “हमने हनी ट्रैपिंग के बारे में तो सुना ही है। महिलाओं के जरिए हनी ट्रैपिंग होती है, इसलिए यह सभी के लिए एक सबक है। अब आप इस खतरे को देखिए, डिजिटल वॉरफेयर के इस युग में यह डर बना रहेगा। जहां तक मुझे याद है, जब मैं स्वयं सीओ था, तब हम भी ऐसा ही करते थे, जब भी देश में इस तरह की कोई घटना होती थी तो हम अपने जवानों को दोबारा जागरूक करते थे। इसलिए अपनी फ्रेटरनिटी को जागरूक करना होगा और परिवारों को भी यह समझना होगा कि दिखावा न करें और खुद को निशाना न बनने दें।”

सेवानिवृत्त कर्नल अजय रैना ने कहा, “जवान काफी जागरूक हैं। जवानों के लिए तो यह एक मानक प्रक्रिया है, आप इसे एसओपी मान लीजिए कि हफ्ते में कम से कम एक बार यूनिट में इस विषय पर पूरा लेक्चर होता है। परिवारों के साथ क्या होता है कि कई बार वे जवानों के साथ रहती हैं और कई बार नहीं रहतीं और जब वे साथ नहीं रहतीं, खासतौर पर तब, उनकी जो सतर्कता होती है कि हां, मैं खतरे में हूं, वह थोड़ी कम हो जाती है। इसलिए इस घटना से सभी को सीख लेनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “अभी देखना होगा कि कितनी एफआईआर दर्ज होती हैं। देखिए जब आप देशद्रोह की बात करते हैं तो यह उच्च स्तर का मामला होता है। हमारी समस्या क्या है कि हमारे कानून में सब कुछ है, लेकिन हम उसे लागू नहीं करते। अभी मैंने सुना है कि देश के विभिन्न हिस्सों में कई एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और मुझे लगता है कि अच्छा हुआ कि इन्होंने अपना मुंह खोल दिया, क्योंकि ये कभी वोट चोरी तो कभी कुछ और मुद्दा उठाते रहते हैं, ऐसे में किसी ने तो सच बोला।”

सेवानिवृत्त कर्नल ने कहा, “अगर आपको याद हो, जब पहले एक आंदोलन चला था तो शेहला राशिद ने भी इसी तरह बोल दिया था, जिसके बाद आंदोलन ही खत्म हो गया और अभी आप देख रहे हैं कि गठबंधन की पूरी पार्टी, जो लोग मंच पर बैठे थे, अब सभी सफाई देने में लगे हैं कि उनका यह मतलब नहीं था, उनका वह मतलब नहीं था। सच्चाई यह है कि सत्ता परिवर्तन पूरी दुनिया में होता है, हमारे पड़ोस में भी हुआ है। जब आप बांग्लादेश का नाम लेते हैं, तो आप उसी इकोसिस्टम का हिस्सा बन जाते हैं।”

उन्होंने कहा कि सरकार को जो करना है वह करेगी, लेकिन जो नागरिक हैं और जिन्हें लगता है कि यह गलत है तो मैं कहूंगा कि आप अपने नजदीकी थाने में जाकर इनके खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज कराएं, इसका और कोई दूसरा तरीका नहीं है।

टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग को लेकर उन्होंने कहा, “फिल्म इंडस्ट्री में बहुत ही जटिल मुद्दे हैं। हम सभी जानते हैं कि पिछले कई सालों से फंडिंग कहां से आ रही है। इसमें छिपाने जैसा कुछ नहीं है। फंडिंग बाहर से आती रही है, तो स्वाभाविक रूप से आपके संबंध भी बाहर से जुड़े होते हैं। लोग उस हिसाब से चलते हैं या नहीं। गुलशन कुमार की हत्या हुई थी, तब भी सभी को पता था कि वह क्यों हुई थी।”

रिटायर्ड कर्नल ने कहा, “जब आप किसी इंडस्ट्री में जाते हैं और यह तय करते हैं कि आपको उस धारा में बहना है या नहीं, तो फिर ऐसी चीजें होती हैं, यह खेल का हिस्सा है। आप सैकड़ों करोड़ की फिल्में बनाते हैं, 100 करोड़, 200 करोड़, हम सब जानते हैं कि पैसा कहां से आता है, तो जो पैसा देता है वह अपनी मांग भी रखता है और जब टकराव होता है तो ऐसी घटनाएं होती हैं।”