अयोध्या, 4 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के हालिया बयान पर रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम, महंत सत्येंद्र दास वेदांती और अन्य संतों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सभी ने कांग्रेस और उनके नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए और उनके बयानों को सनातन धर्म के खिलाफ बताया।
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए दिए 1 लाख 11 हजार रुपये के चंदे को वापस लेने के लिए कोर्ट जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वह अयोध्या में मुकदमा दायर करेंगे और मांग करेंगे कि उनके द्वारा मंदिर निर्माण के लिए दिया गया चंदा वापस किया जाए, क्योंकि उस धन का गबन हुआ है। उन्होंने यह दान भगवान राम में आस्था और भव्य मंदिर निर्माण की भावना से दिया था, लेकिन अब सामने आ रही शिकायतें बेहद चिंताजनक हैं।
दिग्विजय सिंह के इस बयान पर पलटवार करते हुए रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने कहा, “कांग्रेसियों को राम मंदिर पर बोलना ही नहीं चाहिए, क्योंकि अखिल ब्रह्मांड नायक, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चंद्र जी के जन्मस्थान पर बनने वाले मंदिर निर्माण में सबसे बड़ा अगर कोई अवरोधक था तो वो कांग्रेस थी। कांग्रेस का अस्तित्व ही राम मंदिर के विरोध पर रहा। आज जब मंदिर बन गया है तो ये नाटक कर रहे हैं। पूरा देश जानता है इतने वर्षों तक मंदिर निर्माण को किसने रोका हुआ था।”
उन्होंने कलश न स्थापित किए जाने के आरोपों पर कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि सरयू से लेकर श्री राम मंदिर तक हजारों माताओं ने अपने हाथ में कलश रख रखा था। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, “भगवान राम श्याम वर्ण के हैं। यह अब कांग्रेसी बताएंगे, जिनको कुछ पता ही नहीं है, जिनका अस्तित्व ही सनातन धर्म के विरोध पर टिका हुआ है? आप कुछ भी कर लें, आप सनातन समाज की निगाह से गिर चुके हैं।”
इस बीच, महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने भी दिग्विजय सिंह पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि ये लोग पहले भी राम के अस्तित्व पर प्रश्न उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी राम को काल्पनिक बताते थे, वही आज सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब देश में विधि-विधान के साथ राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो चुकी है, तब भी कुछ लोग इस पर राजनीति कर रहे हैं।
महंत वेदांती ने कहा कि मंदिर निर्माण के दौरान वैदिक परंपराओं के अनुसार सभी अनुष्ठान पूरे किए गए और इसमें हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया धार्मिक आस्था और परंपरा के अनुरूप थी, जिसे पूरे देश और दुनिया ने देखा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर इस धार्मिक आयोजन को विवादित बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
साकेत भवन महंत सीताराम दास ने भी दिग्विजय सिंह की टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के बयान मानसिक असंतुलन और भ्रम की स्थिति को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर और राम जन्मभूमि को लेकर जो संघर्ष वर्षों तक चला, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, राम भक्तों की आस्था पर सवाल उठाना गलत है और इससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा होता है।
उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन को कमजोर करने के प्रयास पहले भी होते रहे हैं।
इसी बीच, बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिरों में चढ़ावे और दान को लेकर उठे कथित अनियमितताओं के सवाल पर भी संतों ने अपनी राय दी। महंत सत्येंद्र दास वेदांती ने कहा कि मंदिरों के संचालन में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि दान और चढ़ावे का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक होना चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
दूसरी ओर, धर्मदास महाराज ने कहा कि बद्रीनाथ- केदारनाथ धामों पर सरकारी नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, सरकारी नियंत्रण में व्यवस्थागत गड़बड़ियों की आशंका रहती है, जबकि परंपरागत रूप से ब्राह्मण और धार्मिक समुदाय ही इन धामों की व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संभालते रहे हैं।

