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दिल्ली की थिएटर आर्टिस्ट से बॉलीवुड तक, जोया हुसैन ने आउटसाइडर होकर भी मनवाया अभिनय का लोहा

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मुंबई, 30 सितंबर (आईएएनएस)। फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक आउटसाइडर, जिसे बड़े पर्दे पर आने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा लेकिन एक बार मौका मिलने के बाद उसने अपने अभिनय का लोहा मनवाया और फिल्म सितारों की दुनिया में अपनी चमक बिखेरी। ये कोई और नहीं बल्कि ‘मुक्काबाज’ फेम जोया हुसैन थीं। मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘भैया जी’ में उनके दमदार एक्शन की चर्चा तो हुई ही लेकिन फिल्म में उनकी लेडी लव बनकर एक्ट्रेस ने सबकी लाइमलाइट चुरा ली।

जोया हुसैन का जन्म 1 अक्टूबर को दिल्ली में हुआ था और उन्होंने अपनी पढ़ाई भी यहीं से की है। उनके माता-पिता मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता एक ट्रैवल एजेंसी चलाते हैं जबकि मां पहले चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट थीं और अब कैटरिंग का काम करती हैं। जोया किसी फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं आतीं, इसलिए उनका सफर और भी मुश्किलों भरा रहा।

जोया के अनुसार उनकी फैमिली ने उन्हें हमेशा अपने मन का काम करने की आजादी दी है। वो एक्ट्रेस होने के साथ-साथ स्पोर्ट्स पर्सन भी हैं। उनके पेरेंट्स उन्हें स्पोर्ट्स में भाग लेने के लिए हमेशा प्रेरित करते थे। उन्होंने सिर्फ 17 साल की उम्र में थिएटर में कदम रखा था और वहां लगातार चार साल तक काम किया। यहीं से उनके अंदर एक्टिंग का जुनून पैदा हुआ।

पढ़ाई खत्म करने के बाद वो 2012 में दिल्ली से मुंबई पहुंची। एक आउटसाइडर के लिए मुंबई में पहचान बनाना आसान नहीं था। जोया ने लगातार दो साल तक ऑडिशन दिए। स्ट्रगल के दिनों में उनकी मुलाकात अनुराग कश्यप से हुई। उन्होंने अनुराग की शॉर्ट फिल्म ‘तीन और आधा’ में काम किया।

इसके बाद उन्हें अनुराग कश्यप की ही फिल्म ‘मुक्काबाज’ मिली, जो उनकी पहली बड़ी कमर्शियल फिल्म थी। इसमें उनके काम को खूब सराहा गया। फिल्म में वो एक नेशनल चैंपियन शूटर गर्ल के रोल में नजर आईं थी, जहां उनका एक्शन अवतार लोगों को काफी पसंद आया।

जोया ने एक इंटरव्यू में आउटसाइडर होने का दर्द बयां किया था। उन्होंने कहा था कि ‘मुक्काबाज’ जैसी फिल्म से सफलता मिलने के बाद भी उन्हें लगा था कि ढेर सारे प्रोजेक्ट मिलेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके मुताबिक ऐसा सिर्फ स्टार किड्स के साथ होता है। धीरे-धीरे उन्हें मौके मिले। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि उन्हें प्रोजेक्ट से हटाकर किसी और को ले लिया गया। उन्होंने कहा था कि तकलीफ होती थी लेकिन आगे बढ़ना ही एकमात्र रास्ता था।

जोया हुसैन ‘भैया जी’ और ‘मुक्काबाज’ के अलावा ‘अनकही कहानियां’, ‘हाथी मेरे साथी’ और ‘लाल कप्तान’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। हर फिल्म में उनके किरदार ने उन्हें अलग और दमदार पहचान दी है।