गांधीनगर, 8 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने स्टेट ई-गवर्नेंस मिशन टीम (एसईएमटी), गुजरात के सहयोग से दिव्यांग बस पास डिजिलॉकर से जोड़ दिए हैं। गुजरात सरकार की इस नागरिक-केंद्रित डिजिटल गवर्नेंस पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
राज्य में सारे दिव्यांग बस पास को डिजिलॉकर से जोड़ने के इस नवीन प्रयोग के लिए भारत सरकार ने गुजरात को ‘एक्सीलेंस इन सिटिजन-सेंट्रिक डिजिटल गवर्नेंस’ अवॉर्ड प्रदान किया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग दिव्यांग व्यक्तियों को गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (जीएसआरटीसी) द्वारा संचालित बसों में मुफ्त यात्रा के लिए ‘दिव्यांग बस पास’ देता है। इस पास को अब डिजिलॉकर से जोड़ दिया गया है। यानी अब दिव्यांगजनों को मूल फिजिकल पास अपने साथ रखने की जरूरत नहीं है। दिव्यांग यात्री बस में यात्रा के दौरान बस कंडक्टर को अपने मोबाइल के डिजिलॉकर ऐप में रखा पास बताकर यात्रा कर सकते हैं।
गुजरात सरकार की यह पहल टेक्नोलॉजी के जरिए शासन को अधिक आसान, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करती है। डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत, सरकार ने लगातार पेपरलेस गवर्नेंस और सार्वजनिक सेवाओं के डिजिटल वितरण को बढ़ावा दिया है, ताकि नागरिक कभी भी और कहीं भी अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ प्राप्त कर सकें।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात की यह अभिनव पहल, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से दिव्यांगजनों के लिए सुविधा और सुलभता को बढ़ाकर इस व्यापक विजन को साकार कर रही है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा ने कहा, “सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले ‘दिव्यांग बस पास’ योग्य दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक आधिकारिक दिव्यांगता पहचान पत्र के रूप में काम करता है। विभाग ने सभी पास को डिजिलॉकर से जोड़ दिया है। राज्यभर में अब तक 4.42 लाख से अधिक पास जारी किए गए हैं। लाभार्थी डिजिलॉकर ऐप में रखे पास को दिखाकर जीएसआरटीसी द्वारा संचालित बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकते हैं।”
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव हर्षद पटेल (आईएएस) ने कहा, “डिजिलॉकर से इस पास के जुड़ने के बाद दिव्यांगजनों को अब मूल फिजिकल पास को अपने साथ रखने की जरूरत नहीं है। यही नहीं, इस पास के खो जाने या क्षतिग्रस्त होने की चिंता भी नहीं रहती। क्योंकि यह पास हमेशा डिजिलॉकर में सुरक्षित रहता है और कभी भी एक्सेस किया जा सकता है। यह पहल पेपरलेस गवर्नेंस को बढ़ावा देती है।”
डिजिटल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को मजबूत करने के प्रयासों के तहत भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिविजन (एनईजीडी) ने राज्य के डिजिटल सर्विस प्लेटफॉर्म के साथ डिजिलॉकर के एकीकरण को आसान बनाया है। गुजरात सरकार द्वारा दिव्यांग बस पास को डिजिलॉकर से सफलतापूर्वक जोड़ने के लिए मई-2026 में ‘राज्यों के डेटा के लिए साइबर सुरक्षा ढांचा मजबूत करना’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला के दौरान गुजरात राज्य को अवॉर्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया।
राज्य परिवहन (एसटी) बसों में मुफ्त बस यात्रा के अलावा दिव्यांग बस पास धारक को 4 लाख रुपए का दुर्घटना मृत्यु बीमा कवच भी मिलता है। पास धारक की दुर्घटना में मौत के मामले में, उसका नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी संबंधित विभाग के समक्ष निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत कर बीमा का लाभ हासिल करने का पात्र होता है।

