Monday, August 10, 2026
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ई-वीजा धारकों के लिए भारत ने खोले 11 नए प्रवेश द्वार, अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स की कुल संख्या 88 हुई

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नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। भारत सरकार ने ई-वीजा धारक विदेशी नागरिकों के लिए भारत में प्रवेश को और अधिक आसान बनाने के उद्देश्य से 11 नए अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स को अधिसूचित किया है। इनमें 9 नए लैंड पोर्ट्स और 2 नए हवाई अड्डे शामिल हैं। इस फैसले के बाद ई-वीजा धारकों के प्रवेश के लिए उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स की कुल संख्या बढ़कर 88 हो गई है।

केंद्र सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में पिछले कुछ वर्षों में वीजा व्यवस्था को अधिक उदार, सरल और तकनीक आधारित बनाया गया है। इसका उद्देश्य वैध विदेशी यात्रियों को सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को भी मजबूत करना है।

नई व्यवस्था के तहत अब ई-वीजा धारक विदेशी नागरिक 37 हवाई अड्डों, 38 बंदरगाहों और 13 लैंड पोर्ट्स के माध्यम से भारत में प्रवेश कर सकेंगे। हाल ही में शामिल किए गए हवाई अड्डों में भोपाल और तिरुपति शामिल हैं जबकि नए लैंड पोर्ट्स में अगरतला, दर्रांगा, गेड़े, घोजाडांगा, हरिदासपुर, जयगांव, डावकी, मोरेह और अटारी (रोड) शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि नए पोर्ट्स के जुड़ने से ई-वीजा व्यवस्था की उपयोगिता और आकर्षण और बढ़ेगा। वर्तमान में भारत लगभग 95 प्रतिशत ई-वीजा आवेदनों का निपटारा 72 घंटे से भी कम समय में कर देता है, जिससे विदेशी यात्रियों को तेजी से यात्रा अनुमति मिल रही है।

भारत में ई-वीजा सुविधा की शुरुआत वर्ष 2014 में 43 देशों के नागरिकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ईटीए) के साथ की गई थी। अब यह सुविधा बढ़कर 172 देशों के नागरिकों तक पहुंच चुकी है। सरकार के अनुसार, वर्तमान में जारी किए जाने वाले कुल वीजा में लगभग 78 प्रतिशत हिस्सेदारी ई-वीजा की है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

ई-वीजा सुविधा फिलहाल 17 विभिन्न श्रेणियों में उपलब्ध है। इनमें पर्यटक, व्यवसाय, चिकित्सा, छात्र, ट्रांजिट, पर्वतारोहण और क्रूज यात्रियों के लिए समूह विजिटर वीजा जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से पर्यटन, व्यापार, चिकित्सा यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, विदेशी यात्रियों को भारत आने के लिए अधिक विकल्प और बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे देश की वैश्विक पर्यटन और निवेश क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।