Saturday, August 8, 2026
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ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का हमला, बोले- लोगों की जेब से सीधे पैसे निकाल रही सरकार

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नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित) ईंधन को लेकर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस जल्द ही इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह योजना लोगों की गाड़ियों को नुकसान पहुंचा रही है और उनकी जेब से सीधे पैसे निकाले जा रहे हैं।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा, “ई20 का मुद्दा बेहद गंभीर है। आमतौर पर कहा जाता है कि ‘दाल में कुछ काला है’, लेकिन यहां तो पूरी दाल ही काली है।”

उन्होंने कहा कि किसी भी जन अभियान में यह तय करना पड़ता है कि किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। फिलहाल भ्रष्टाचार से जुड़े इतने अधिक मामले हैं कि प्राथमिकताओं की लंबी सूची बन गई है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस ई20 के मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाएगी।

राहुल गांधी ने कहा, “ई20 लोगों की कारों और स्कूटरों को नुकसान पहुंचा रहा है, उनकी जिंदगी पर असर डाल रहा है और सचमुच उनकी जेब से सीधे पैसे निकाल रहा है।”

राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस ने हाल ही में आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार की ई20 पेट्रोल को बढ़ावा देने की नीति से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है, जबकि इसका सबसे अधिक फायदा एथेनॉल उत्पादकों को मिल रहा है। पार्टी का दावा है कि सस्ता ईंधन मिलने के सरकारी दावों के बावजूद आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि मार्च 2025 से देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लगभग केवल ई20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है।

उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने दावा किया था कि एथेनॉल मिश्रण से डीजल की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल का विकल्प 55 रुपये प्रति लीटर तक उपलब्ध होगा, लेकिन ऐसा कोई लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला।

जयराम रमेश ने एक स्वतंत्र विश्लेषण का हवाला देते हुए दावा किया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच एथेनॉल मिश्रित ईंधन से कम माइलेज मिलने के कारण देशभर के उपभोक्ताओं पर करीब 88,234 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इस नीति का खामियाजा सीधे आम वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।