Wednesday, July 8, 2026
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ईडी की कार्रवाई, लील इलेक्ट्रिकल्स और प्रमोटर परिवार की 112.90 करोड़ रुपए की संपत्तियां कुर्क

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जयपुर, 7 जुलाई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एम/एस लील इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (पूर्व में लॉयड इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड), उसके प्रमुख प्रमोटर भारत राज पुंज और अन्य संबंधित व्यक्तियों की लगभग 112.90 करोड़ रुपए मूल्य की 22 चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है।

ईडी ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की है।

कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में स्थित भूमि, औद्योगिक भूखंड और आवासीय संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका के टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन शहर में स्थित एक आवासीय संपत्ति भी अटैच की गई है।

ईडी ने बैंक खातों में जमा राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड निवेशों को भी कुर्क किया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, ये संपत्तियां कंपनी के प्रमोटर परिवार के स्वामित्व और नियंत्रण में थीं तथा अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को छिपाने के लिए इन्हें संबंधित कंपनियों और शेल संस्थाओं के माध्यम से रखा गया था।

ईडी ने अपनी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। सीबीआई ने कंपनी, उसके प्रमोटरों और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था।

सीबीआई की एफआईआर और बाद में दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, कंपनी के प्रमोटरों और शीर्ष प्रबंधन ने मिलकर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह को धोखा देने की साजिश रची थी। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी और हेरफेर किए गए वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत किए गए, जिससे एसबीआई और आईडीबीआई बैंक को करीब 376 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर कर बैंक फंड की कथित हेराफेरी की। कंपनी की बैलेंस शीट में संपत्तियों, स्टॉक और प्राप्तियों का मूल्य बढ़ाकर दिखाया गया, ताकि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत दिखाई दे और बैंकों से लगातार ऋण सुविधाएं मिलती रहें।

जांच में यह भी पता चला कि बैंकों से प्राप्त धनराशि को प्रमोटरों के नियंत्रण वाली कंपनियों और संबंधित संस्थाओं के जरिए इधर-उधर भेजा गया। इसके अलावा निवेश और ऋण के नाम पर रकम विदेशों में स्थित सहायक कंपनियों को भी ट्रांसफर की गई।

ईडी के अनुसार, विदेशों में मौजूद कई सहायक कंपनियों का पूरा नियंत्रण भारत राज पुंज के पास था। जांच में पाया गया कि बड़ी मात्रा में धनराशि इन विदेशी कंपनियों के माध्यम से भारत से बाहर भेजी गई और उसका बड़ा हिस्सा वापस नहीं आया। इसी आधार पर टेक्सास (अमेरिका) में स्थित वह आवासीय संपत्ति भी कुर्क की गई है, जो भारत राज पुंज और उनकी पत्नी पूजा पुंज के संयुक्त स्वामित्व में है। ईडी का मानना है कि यह संपत्ति अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थी।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर हेराफेरी की गई रकम को बाद में विभिन्न अचल संपत्तियों में निवेश किया गया। इनमें से कई संपत्तियां प्रमोटर परिवार के सदस्यों और संबंधित कंपनियों के नाम पर खरीदी गई थीं। ईडी ने यह भी दावा किया कि कुछ संपत्तियों को बाद में बेच दिया गया और उससे प्राप्त धन का उपयोग प्रमोटर परिवार के निजी एवं व्यावसायिक खर्चों के लिए किया गया। इसमें भारत राज पुंज की मां रेणु पुंज को किए गए भुगतान भी शामिल हैं।