गाजियाबाद, 26 जून (आईएएनएस)। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर उठे विवाद पर आध्यात्मिक नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि ‘आस्था की लूट’ बताया और मामले की गहराई से निष्पक्ष जांच की मांग की।
गाजियाबाद में आईएएनएस से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह कोई सामान्य चोरी का मामला नहीं है बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा, “यह किसी दुकान या फैक्ट्री की चोरी नहीं है, यह आस्था की लूट है। इसमें एक-दो इस्तीफों से बात खत्म नहीं होती, इसकी तह तक जाना जरूरी है।”
उन्होंने दावा किया कि यह मामला केवल कुछ करोड़ रुपये का नहीं बल्कि हजारों करोड़ रुपये के स्तर तक का हो सकता है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है, इसलिए उम्मीद है कि जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ेगी। निष्पक्षता के लिए वरिष्ठ लोगों का इस्तीफा देना जरूरी था। नैतिक दायित्वों का निर्वहन करना बड़ा आवश्यक है क्योंकि पद होना बड़ी बात नहीं है, धर्म का रहना बड़ी बात है।
वहीं, विपक्ष द्वारा महासचिव चंपत राय व अनिल मिश्रा पर एफआईआर न दर्ज किए जाने को लेकर उठाए गए सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि विपक्ष इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक रंग देने और राम मंदिर परियोजना को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग कभी राम मंदिर निर्माण के विरोध में थे, वही आज इस मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इस तरह के आरोपों से उसकी गरिमा प्रभावित नहीं हो सकती। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वे हर अवसर को विवाद में बदलने की कोशिश करते हैं, लेकिन जनता सच्चाई समझती है।
इस बीच, नासिक स्थित गंगा गोदावरी पंचकोटी पुरोहित संघ के अध्यक्ष सतीश पुरोहित ने भी राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्यों के कथित इस्तीफे और चढ़ावे से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों भक्तों की आस्था और योगदान का परिणाम है।
सतीश पुरोहित ने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया धन, चाहे वह सोने, चांदी या अन्य रूप में हो, पूरी तरह भगवान को समर्पित माना जाता है। उन्होंने कहा कि एक बार अर्पित होने के बाद उस पर व्यक्तिगत अधिकार समाप्त हो जाता है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो वह गंभीर विषय है और इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि वे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक आस्था के केंद्र भी होते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशासन और ट्रस्ट मिलकर इस मामले की सच्चाई सामने लाएंगे और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

