नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। ‘कॉमनवेल्थ गेम्स’ राष्ट्रमंडल देशों का प्रमुख बहु-खेल आयोजन है, जिसमें प्रत्येक चार वर्ष में एथलीट विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसकी प्रेरणा साल 1911 में लंदन में आयोजित इंटर-एम्पायर चैंपियनशिप से ली गई थी, जो किंग जॉर्ज पंचम के राज्याभिषेक का जश्न मनाने के लिए उत्सव का एक हिस्सा था। हालांकि, यह ‘कॉमनवेल्थ गेम्स’ का आधिकारिक संस्करण नहीं था।
कनाडा के स्पोर्ट्स राइटर मेल्विल मार्क्स रॉबिन्सन साल 1928 एम्स्टडर्म ओलंपिक में शामिल होकर लौटे थे, जिसके बाद उन्हें इस तरह के खेल आयोजन का विचार आया। आखिरकार, साल 1930 में 16-23 अगस्त के बीच कनाडा के हैमिल्टन में ‘ब्रिटिश एम्पायर गेम्स’ का आयोजन हुआ, जिसमें 11 देशों के करीब 400 एथलीट्स ने हिस्सा लिया। ‘ब्रिटिश एम्पायर गेम्स’ में उन देशों को शामिल किया गया, जो उस समय तक ब्रिटेन के उपनिवेश का हिस्सा थे, या पहले कभी उपनिवेश रहे थे।
उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारतीय ओलंपिक संगठन का खेलों के अंतरराष्ट्रीय मंच पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक ढांचा तैयार नहीं था। ऐसे में भारत ‘ब्रिटिश एम्पायर गेम्स’ के पहले संस्करण में हिस्सा नहीं ले सका।
इस संस्करण में 8 खेलों के 59 इवेंट्स शामिल किए गए। सभी सिंगल्स मुकाबले थे। पहले संस्करण में महिलाओं के लिए सिर्फ तैराकी एकमात्र इवेंट था। खिलाड़ियों के ठहरने और प्रैक्टिस के लिए हैमिल्टन के सिविक स्टेडियम के पास मौजूद प्रिंस ऑफ वेल्स स्कूल को खेल गांव बना दिया गया था, जिसके एक-एक क्लासरूम में दो-दो दर्जन खिलाड़ियों के ठहराया गया।
उद्घाटन के बाद से प्रत्येक 4 साल में इन खेलों का आयोजन होता है। हालांकि, द्वितीय विश्व युद्ध के कारण साल 1942 और 1946 में इसका आयोजन नहीं हो सका था। साल 1978 में इन खेलों को ‘कॉमनवेल्थ गेम्स’ के रूप में पहचान मिली।
साल 1934 में पहली बार भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया। भारत ने अपने डेब्यू में एक पदक जीता था। राशिद अनवर कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, जिन्होंने 74 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। साल 1958 में मिल्खा सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बने, जिन्होंने 440 यार्ड इवेंट में पहला स्थान अपने नाम किया।
साल 1958 में ट्रैक एंड फील्ड एथलीट स्टेफनी डिसूजा और एलिजाबेथ डेवनपोर्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जिसके 20 साल बाद साल 1978 में अमी घिया और कंवल सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला थीं।
भारत ने चीन के साथ युद्ध के चलते 1962 कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा नहीं लिया, जिसके बाद साल 1986 में साउथ अफ्रीका की ‘रंगभेद की नीति’ के विरोध में कई देशों के साथ सामूहिक बहिष्कार का हिस्सा बनते हुए इन खेलों से खुद को अलग रखा था।
कॉमनवेल्थ गेम्स ने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच दिया है। इस प्रतियोगिता ने उन्हें उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा, अनुभव और आत्मविश्वास प्रदान किया, जिससे उनके प्रदर्शन में निखार आया। कई खिलाड़ियों ने इन खेलों में शानदार प्रदर्शन के दम पर ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में भी सफलता हासिल की।

