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फरक्का जल संधि से बिहार को हुआ नुकसान, 12 जिलों में ‘नीतीश संवाद’ के जरिए लोगों को जागरूक करेगी जेडीयू

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पटना, 5 सितंबर (आईएएनएस)। जनता दल (यूनाइटेड) ने फरक्का जल संधि और बिहार के जल संसाधनों से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य में जनजागरूकता अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि पार्टी ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम के तहत 12 जिलों की यात्रा करेगी। इस दौरान बिहार के साथ हुए अन्याय और फरक्का बैराज व जल संधि के कारण राज्य को हुए नुकसान के बारे में लोगों को जानकारी दी जाएगी।

जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद संजय कुमार झा ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम 12 जिलों का दौरा शुरू कर रहे हैं। हमारे राज्य जेडीयू अध्यक्ष रमेश कुशवाहा और मैं मिलकर यह यात्रा कर रहे हैं। इसका मुख्य मकसद लोगों तक पहुंचना और जागरूकता फैलाना है। हम लोगों को बिहार के साथ हुए गंभीर अन्याय और फरक्का जल संधि के कारण पिछले 30 साल में राज्य को हुए भारी नुकसान के बारे में बताएंगे। चूंकि यह संधि इस दिसंबर में खत्म होने वाली है और हमारे नेता नीतीश कुमार व हमारी पार्टी ने हमेशा फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि का विरोध किया है, इसलिए हमारा रुख साफ है: इस संधि को मौजूदा रूप में आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। अगर किसी विकल्प पर विचार किया जाता है, तो उसमें बिहार की पानी से जुड़ी चिंताओं का समाधान 2050 तक की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

संजय कुमार झा ने कहा कि वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा के साथ मिलकर यह यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों तक पहुंचना और बिहार के हितों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता पैदा करना है। जेडीयू का दावा है कि फरक्का जल संधि के कारण पिछले करीब 30 वर्षों में बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि की मौजूदा अवधि दिसंबर में समाप्त होने वाली है। ऐसे में पार्टी ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। संजय झा के मुताबिक, नीतीश कुमार के नेतृत्व में जेडीयू शुरू से ही फरक्का बैराज और फरक्का जल संधि का विरोध करती रही है। पार्टी का मानना है कि मौजूदा स्वरूप में इस संधि को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

जेडीयू नेता ने यह भी कहा कि यदि संधि के स्थान पर किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाता है तो उसमें बिहार के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। खास तौर पर राज्य की जल संबंधी समस्याओं और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था तैयार होनी चाहिए, जो वर्ष 2050 तक बिहार की आवश्यकताओं का समाधान कर सके।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कश्मीर को लेकर बकिंघम के मेयर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी विदेशी मेयर को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। सरावगी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग हैं और इस पर कोई बहस नहीं हो सकती।

स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े मामले पर भी सरावगी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को जातिगत रंग देने की राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह का रवैया उचित नहीं है। उन्होंने राजनीतिक दलों से ऐसे मामलों में जातिगत आधार पर राजनीति से बचने की अपील की।

बिहार में मेडिकल शिक्षा के विस्तार को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि समस्तीपुर के श्री राम जानकी कॉलेज और छपरा मेडिकल कॉलेज को एमएमबीएस की 50-50 सीटों की मंजूरी मिली है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का आभार जताया। उनके मुताबिक, इन मंजूरियों से राज्य में मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे और आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलेगा।