Friday, July 31, 2026
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‘घूसखोर पंडत’ टाइटल पर संतों का आक्रोश, सामाजिक सौहार्द के लिए बताया खतरा

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अयोध्या, 6 फरवरी (आईएएनएस)। नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर देश के प्रमुख धार्मिक संतों और महंतों ने तीखी आपत्ति जताई है। इस कड़ी में देश के कई प्रमुख धार्मिक नेताओं और संत-महंतों ने इस फिल्म की कड़ी आलोचना की है और इसे समाज के लिए घातक बताया है। उनका कहना है कि इस तरह का टाइटल और कंटेंट समाज में नफरत फैलाने का काम करता है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकता है।

अयोध्या के साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास जी महाराज ने इस फिल्म को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा, “किसी एक समुदाय को जानबूझकर निशाना बनाना और उसके नाम के साथ आपत्तिजनक शब्द जोड़ना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। ‘घूसखोर पंडत’ जैसा शब्द अपमानजनक है। यह पूरे समाज को गलत नजर से देखने की सोच को बढ़ावा देता है।”

उन्होंने सवाल उठाया कि फिल्म बनाने वालों को अगर सामाजिक बुराइयों पर बात ही करनी थी, तो क्या अन्य धर्मों या समुदायों में ऐसे लोग नहीं मिलते? उन्होंने कहा, ”ब्राह्मण समाज को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि वह सहनशील है और देशहित में हमेशा समर्पित रहा है। ऐसे शांत और सरल समाज को टारगेट करना अत्यंत निंदनीय है।”

सिद्ध पीठ हनुमान गढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने इस पूरे मामले में सेंसर बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “ऐसी फिल्मों को पास कैसे किया जाता है जो समाज में टकराव और विभाजन पैदा करने का काम करती हैं? यह फिल्म किसी एक समाज को अपमानित करने और उसे बदनाम करने की कोशिश करती है, जो किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकती। इस मामले में कठोर से कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, फिल्म निर्माताओं को पूरे ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। बिना माफी और सख्त कार्रवाई के इस तरह की प्रवृत्तियों पर रोक लगाना संभव नहीं होगा।”

हनुमानगढ़ी के संत अमित दास जी महाराज ने भी फिल्म को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ”किसी धर्म या जाति को फिल्म के माध्यम से गलत ढंग से पेश करना समाज में गलत संदेश देता है। ऐसी फिल्में लोगों को आपस में लड़ाने का काम करती हैं। सेंसर बोर्ड को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और ऐसी फिल्मों पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए। यह फिल्म समाज में नफरत फैलाने का कारण बन सकती है। इसलिए फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के प्रदर्शन पर तुरंत रोक लगाई जाए और इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए।”