पुणे, 29 अगस्त (आईएएनएस)। पुणे पुलिस ने गणेशोत्सव समेत आने वाले त्योहारों और शहर में होने वाले विभिन्न आंदोलनों को देखते हुए शनिवार को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। आदेश के तहत 14 दिन तक धारा 37 लागू रहेगी और पांच से ज्यादा लोगों की सभा पर रोक रहेगी।
यह आदेश 1 सितंबर को रात 12.01 बजे से 14 सितंबर की रात 12 बजे तक यानी 14 दिनों के लिए पूरे पुणे शहर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में लागू रहेगा। यह आदेश महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 37 (1), (2) और (3) के तहत जारी किया है।
पुलिस के इस आदेश के मुताबिक, त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही मोर्चे, धरना, प्रदर्शन और अन्य आंदोलनों के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही कमर कस ली है।
पुणे शहर में आने वाले दिनों में दहीहंडी, वीर गोगादेव जयंती, गणेशोत्सव और अन्य धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होने हैं। इसी दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से जनता की मांगों को लेकर मोर्चे, धरने, प्रदर्शन, बंद और अनशन भी किए जाते हैं।
इसके अलावा अतिक्रमण हटाने जैसी कार्रवाई के दौरान विरोध या तनाव की स्थिति पैदा होने की संभावना रहती है। पुलिस ने इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
आदेश के तहत प्रतिबंधित अवधि में विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ या ज्वलनशील तरल पदार्थ अपने साथ रखना प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा पत्थर, हथियार, फेंकने वाले हथियार या किसी तरह की ऐसी सामग्री साथ रखने, जमा करने या तैयार करने पर भी रोक रहेगी। तलवार, भाला, बंदूक, लाठी, डंडा, सोटा या किसी व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुंचाने में इस्तेमाल की जा सकने वाली वस्तु लेकर चलने पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस के आदेश के मुताबिक, किसी व्यक्ति या नेता के चित्र, प्रतिमा या प्रतीकात्मक पुतले का सार्वजनिक प्रदर्शन या दहन करने की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही ऐसे पोस्टर, बैनर, चित्र, चिन्ह या अन्य सामग्री तैयार करने, प्रदर्शित करने या प्रसारित करने पर भी रोक रहेगी, जिससे सार्वजनिक नैतिकता, सुरक्षा या कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
प्रतिबंध के दौरान भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक या अश्लील नारे, सार्वजनिक रूप से विवाद पैदा करने वाली टिप्पणी और माहौल खराब करने वाली गतिविधियों पर पुलिस की नजर रहेगी। ऐसे भाषण या गतिविधियां जिनसे लोगों में तनाव पैदा हो या सार्वजनिक शांति और सुरक्षा को खतरा पहुंचे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पुणे पुलिस ने पहली बार नहीं, बल्कि मौजूदा हालात को देखते हुए सोशल मीडिया पर भी सख्ती का संकेत दिया है। आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि अपराधियों की रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालकर दहशत फैलाने या किसी को धमकी देने जैसी गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।
यानी सोशल मीडिया पर किसी अपराधी की छवि को बढ़ावा देने, उसके जरिए डर का माहौल बनाने या धमकी देने की कोशिश करने वालों पर भी पुलिस कार्रवाई कर सकती है।
सबसे अहम प्रावधान महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम की धारा 37(3) के तहत है। इसके अनुसार पांच या पांच से अधिक लोगों की सभा या जुलूस निकालने के लिए पुणे शहर पुलिस आयुक्त की पूर्व अनुमति जरूरी होगी।
इसका सीधा असर सार्वजनिक मोर्चे, आंदोलन, प्रदर्शन और जुलूसों पर पड़ेगा। बिना अनुमति भीड़ जुटाने या जुलूस निकालने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों और ऐसे लोगों पर यह आदेश लागू नहीं होगा, जिन्हें अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के अनुसार कर्तव्य पूरा करने के लिए हथियार रखना जरूरी है।
इसके अलावा निजी सुरक्षा रक्षक, गुरखा और चौकीदार, जो 3.5 फीट तक लंबी लाठी रखते हैं, उन्हें भी इस आदेश से छूट दी गई है।
पुलिस ने नागरिकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम 1951 की धारा 135 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश की अवधि समाप्त होने के बाद भी इस दौरान हुए उल्लंघन को लेकर जांच, कानूनी कार्रवाई, दंड, जब्ती या सजा की प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है।
